दिल्ली के तिलक नगर में महिला का शव मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी पहचान को लेकर थी। महिला वहां कैसे पहुंची और उसे कौन लेकर आया, इसका पता लगाने के लिए पुलिस के पास कोई चश्मदीद नहीं था। ऐसे में पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी की जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार, आला अधिकारियों के निर्देश पर 50 पुलिसकर्मियों को जांच में लगाया गया। फुटेज की जांच में पुलिस को आधी अधूरी कामयाबी भी मिली। घटनास्थल पर शव को फेंकने वाली जगह का फुटेज तो नहीं मिला, लेकिन संदिग्ध सेंट्रो कार दिखी। फुटेज से कार के रजिस्ट्रेशन नंबर मिला। इसके बाद पुलिस ने टीम गठित कर कार मालिक का पता लगाया। एक टीम ने रास्तों पर लगे सभी सीसीटीवी की जांच शुरू की।
करीब 13 घंटे तक 125 सीसीटीवी जांच करते हुए पुलिस जनकपुरी बी ब्लॉक पहुंची। यहां जांच में पता चला कि आरोपी गेट संख्या एक से सोसाइटी में कार लेकर घुसा और उतरने के बाद खुद गेट संख्या तीन से सोसाइटी में गया। पुलिस ने सोसाइटी में रहने वाले लोगों से कार के मालिक के बारे में पूछा। इसमें गुरप्रीत के बारे में पता चलने पर पुलिस ने घर की घेराबंदी कर दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसे यकीन था कि महिला के विदेशी होने से उसकी पहचान नहीं हो पाएगी। उसने पूरी तरह साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया। उसे इस बात का पता था कि दिल्ली में सभी जगह पर सीसीटीवी लगे होते हैं। ऐसे में गुरप्रीत ने जनकपुरी की एक परिचित महिला के आधार कार्ड के जरिये सेकेंड हैंड कार डीलर से दो लाख रुपये में खरीदी थी। कार महिला के नाम से रजिस्टर्ड थी। इसके बाद पुलिस डीलर के पास पहुंची तो पता चला कि अक्तूबर की शुरुआत में महिला के आधार कार्ड पर कार बेची गई है। पुलिस महिला के पास पहुंची तो उसे कार खरीदे जाने की जानकारी नहीं थी।