इस दिन वह हुआ जिसकी कभी कल्पना नहीं की गई थी। इसके बाद से यहां के इंडस्ट्रियल हब की फिजा ही बदल गई। 18 जुलाई को मारुति के मानेसर प्लांट में हुए श्रमिक विवाद में कंपनी के एचआर हेड को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
स्थिति यह है कि कंपनियों ने अघोषित रूप से स्थानीय ही नहीं हरियाणा के लोगों को नौकरी देना बंद कर दिया। यहां तक कि हरियाणा मूल के लोगों को गुड़गांव से लेकर धारूहेड़ा के औद्योगिक यूनिटों में नौकरी हासिल करना आसान नहीं रहा।
मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू का कहना है कि मारुति कांड के बाद से उनकी कंपनी ने श्रमिकों की भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा कार्यक्रम शुरू हो गया है।
मारुति कांड की दूसरी बरसी पर जुटेंगे श्रमिक
मारुति के चारों प्लांटों के श्रमिक मारुति कांड की दूसरी बरसी पर खेड़कीदौला सुजूकी प्लांट, मानेसर पावर ट्रेन प्लांट, मानेसर मारुति प्लांट और उद्योग विहार के मुख्य मारुति प्लांट के 10 हजार से अधिक श्रमिक बरसी के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कुलदीप जांघू ने बताया कि मानेसर के श्रमिक 18 जुलाई को राजीव चौक और गुड़गांव प्लांट के श्रमिक गौशाला ग्राउंड में एकत्र होंगे। वहां से पैदल मार्च कर लघु सचिवालय आएंगे और जिला उपायुक्त को ज्ञापन देंगे। इस बार भी बांस, अलियर ढाणी, कासन और मानेसर गांव के लोगों के विरोध के चलते गुड़गांव में बरसी का कार्यक्रम होगा।
मारुति कांड की कुछ खास बातें...
-मानेसर प्लांट में सुबह 9:00 बजे विवाद शुरू हुआ
-दोपहर 12:30 बजे वहां पुलिस पहुंची
-शाम 7:20 विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया
-मारुति कंपनी प्रबंधन ने 546 श्रमिकों को बर्खास्त किया
-मारुति के बर्खास्त कर्मियों और उनके परिवार वालों ने की थी पदयात्रा