देश विदेश के छात्र पढ़ाई के साथ शोध भी कर सकेंगे
संस्थान में श्रीलंका, ईरान, बांग्लादेश, उजबेकिस्तान व अन्य देशों के छात्रों को भी शिक्षा प्रदान करने के साथ यूनानी पद्धति का प्रचार प्रसार करेगा। इसमें यूनानी दवाओं पर विभिन्न तरह के शोध किए जाएंगे। यहां यूनानी पद्धति में परास्नातक और पीएचडी की शिक्षा भी दिलाई जाएगी। परिसर में 425 कारों की पार्किंग की सुविधा भी है।
संस्थान में ये हैं सुविधाएं
ओपीडी, चार ऑपरेशन थिएटर, नर्सरी, सामान्य वार्ड, प्राइवेट वार्ड, आईसीयू, एक्यूप्रेशर कक्ष, फिजियोथेरेपी कक्ष, पंचकर्म कक्ष, जिम्नेजियम, सीएसएसडी, कैंटीन, शैक्षणिक और प्रशासनिक ब्लॉक, ट्यूटोरियल रूम, सेमिनार हॉल, म्यूजियम, लाइब्रेरी, लैब, बहुउद्देश्यीय शोध विभाग, यूनानी फार्मेसी, प्रशासनिक कक्ष व कंप्यूटर कक्ष बने हैं। इसकी निगरानी राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान बंगलूरू से होगी।
मार्च 2019 में शुरू हुआ था निर्माण
संस्थान का निर्माण एक मार्च 2019 से शुरू हुआ था। तत्कालीन केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपद नाइक और केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने शिलान्यास किया था। उस समय 2022 में इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।