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खाने से पहले करें गौर, कहीं नकली खाद्य पदार्थ तो नहीं खा रहे आप

Thu, 23 Jun 2016 01:35 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
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दूध - फोटो : getty images
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एक ओर केंद्र सरकार योग के जरिये निरोग रखने के लिए योग दिवस मना रही है, वहीं प्रदेश सरकार सेहत को लेकर लापरवाह है। लोगों की सेहत यहां राम भरोसे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थ खाकर लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
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लंबे समय तक नकली दूध और घी अब न्यूरो, लीवर और किडनी की बीमारी दे रहा है। वहीं, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बनाए गए फूड सेफ्टी एक्ट भी जिले में केवल कागजी साबित हो रहा है।

दरअसल, खाद्य पदार्थों की निगरानी की जिम्मेदारी फूड सेफ्टी विभाग के पास है, लेकिन 18 लाख की आबादी वाले इस शहर में कोई स्थायी अधिकारी तक नहीं है। इसी का फायदा यहां के मिलावटखोर उठा रहे हैं।
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जिले में नकली दूध, घी, मावा और अन्य पदार्थों की खेप पहुंच रही है। सूत्रों की मानें तो मेवात, राजस्थान और दिल्ली से दूध के अलावा दुकानों पर मिलने वाली चटनी, सॉस, नकली तेल, चाय पत्ती और काली मिर्च सबसे अधिक सप्लाई हो रही है।

एक अनुमान के मुताबिक 30 फीसदी मार्केट पर इसका कब्जा है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसके खाने से लोगों में लीवर और किडनी की अधिक समस्या हो रही हैं।
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दूध
सिविल अस्पताल के फिजिशयन डॉ. काजल का कहना है कि मिलावटी दूध का सेहत पर अधिक असर पड़ता है। अगर नकली दूध में कास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उससे किडनी फेल होने तक का खतरा है।

मेदांता के न्यूरो सर्जन डॉ. विपुल गुप्ता कहते हैं कि नकली खाद्य पदार्थ का न्यूरो पर प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में एक मरीज के केस हिस्ट्री में पाया गया कि नकली दूध की वजह से उसके ब्रेन का कुछ हिस्सा बंद हो गया था।

इस माह नहीं लिया गया सैंपल
नियमानुसार महीने में कम से कम 30 जगहों से खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने होते हैं, लेकिन अधिकारियों की कमी और वर्कलोड के कारण यह महज कागजों तक सिमटा है।

जून में अब तक कहीं से कोई सैंपल नहीं लिया गया। अप्रैल-मई महीने में केवल चार सैंपल लिए गए, वो भी केवल शिकायत के आधार पर। गुड़गांव के मॉल और कर्मशियल क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग हाथ डालने से भी परहेज करता है।

कौन करेगा शहर में निगहबानी
साइबर सिटी में बिक रहे खाद्य पदार्थों की निगहबानी के लिए कोई स्थायी अधिकारी नहीं है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से अभी तक किसी को स्थायी कार्यभार नहीं सौंपा गया है, जबकि यहां करीब छोटे-बड़े 30 हजार के करीब फूड वेंडर है।


इसके अलावा दिल्ली-राजस्थान और यूपी से मिलावटी खाद्य पदार्थ भी लगातार आते रहते हैं, लेकिन कोई स्थायी निगहबान नहीं होने से लोगों की सेहत रामभरोसे हैं। जिन अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, वो केवल एक दिन आते हैं। उनका भी अधिकांश समय कोर्ट केस में बीत जाता है।
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