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नाटकों के गुलदस्ते में हंसी से लोटपोट हुए दर्शक

Sun, 08 Nov 2015 06:24 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
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शहर के सेक्टर-29 स्थित ओपन एयर थिएटर में शनिवार की देर शाम आयोजित नाट्य बेला में अविघ्न थिएटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘गुलदस्ता’ का मंचन किया।
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सुहासिनी रस्तोगी निर्देशन में कलाकारों ने समकालीन शिक्षा प्रणाली पर तीखा व्यंग्य कसा। हैं। नगर निगम की ओर से आयोजित नाट्य बेला में मंचित नाटक गुलदस्ता तीन कहानियों रूपी फूलों के संग्रह से तैयार किया था।

इसमें पहली कहानी फ्रिट्स कॉरिंथी के मूल हंगरी प्ले के अंग्रेजी अनुवाद ‘द रिफंड’ पर आधारित थी। इसमें आठ साल पहले शिक्षा ग्रहण कर चुका एक विद्यार्थी अपने विद्यालय पहुंचकर एक अजीब तरह का रिफंड मांगता है।
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उसका मत है कि विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के बाद उसे कामयाबी हासिल नहीं हुई, इसलिए उसकी 8 वर्षों की फीस वापस की जाए, लेकिन विद्यालय के पि्रंसीपल और प्रोफेसर फीस वापस नहीं करते, बल्कि उसकी फिर से उल-जुलूल परीक्षा लेकर उसे पास करके वापस भेज देते हैं।

यहां विद्यार्थी और टीचरों की आपसी बातचीत ने दर्शकों को गुदगुदाने के लिए मजबूद कर दिया। गुलदस्ता की दूसरी कहानी ‘चाय की प्याली’ कैथरीन मैंस्फील्ड की अंग्रेजी कहानी ए कप ऑफ टी पर आधारित थी।

इस नाटक में समाज के अभिजात वर्ग की भौतिकतावादी प्रवृति, असुरक्षा एवं ईर्ष्या की भावना पर व्यंग्य किया गया। तीसरी कहानी में कलाकारों ने एचएच मुनरो उर्फ साकी की मूल अंग्रेजी लघु कहानी द ओपन विंडो अर्थात खुला दरवाजा का मंचन किया गया।

इसमें शुरू से अंत तक एक विशेष जिज्ञासा की प्रधानता रही और उसका पटाक्षेप भी एक अनोखे अंदाज में हुआ। कलाकारों ने बताया कि आमतौर पर दरवाजे खुले रखना अच्छा नहीं होता। खिड़कियां खुली और दरवाजे बंद ही अच्छे होते हैं।
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