फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों के बलात्कार का इन जगहों पर है ज्यादा खतरा!

विज्ञापन
विज्ञापन
आमतौर पर स्कूल ऐसी जगह है जहां बच्चों को भेजकर मां-बाप चिंता से मुक्त हो जाते हैं। पिछले दो दिनों में दिल्ली में लगातार हुई कुछ घटनाओं के बाद मां-बाप की यह टेंशन घटने के बजाए और बढ़ने लगी है।
विज्ञापन


वैसे तो पिछले दो दिनों में जो कुछ हुआ वह नया नहीं है लेकिन, प्ले स्कूल तक में वहशियों के हाथों यौन शोषण की घटनाएं खतरे की घंटी है। बता दें कि गुरूवार को दिल्ली के रोहिणी और शुक्रवार को हरिनगर के प्ले-स्कूलों में क्रमशः ढाई साल और तीन साल की बच्चियों के साथ स्कूल स्टाफ और मालिक के बेट ने यौन शोषण किया।

लगभग एक महीने पहले दिल्ली के ही लुडलो कैसल स्कूल में 12वीं के एक छात्र ने 5 वर्षीय बच्ची का रेप किया था। इन घटनाओं के बाद गुस्साए अभिभावकों ने स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है। वो यह भी चाहते हैं कि समय-समय पर स्कूल अपने स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन भी कराएं।
विज्ञापन

अपने बच्चों को यहां न जाने दें अकेले

दिल्ली के स्कूलों में हुई कई घटनाओं के बाद यह साबित हो गया है कि यह बच्चों के लिए बहुत सुरक्षित जगह नहीं है। स्कूलों में टॉयलेट, खाली क्लासरूम, खाली प्ले ग्राउंड, खाली क्लास-लैब, स्कूल कैब व बस तो ऐसी जगह हैं, जहां बच्चों को अकेले जाने नहीं देना चाहिए।

माता-पिता को अपने बच्चों को इन जगहों पर अकेले ना जाने देने के लिए जागरूक करना चाहिए। लुडलो कैसल स्कूल में हुई घटना के बाद डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन ने स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर कुछ निर्देश जारी किए। इसके महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं ...

1. यदि स्कूल के मेल स्टाफ द्वारा बच्चों, खासतौर से लड़कियों को अनावश्यक या जानबूझकर छूने या उनके करीब जाने की कोशिश की जाती है तो इसकी शिकायत हेड ऑफ स्कूल से की जानी चाहिए।
2. किसी भी छात्र को खाली क्लास इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
3. स्कूलों को भी टॉयलेट आदि पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।

इस बारे में जब डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन पद्मिनी सिंगला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि डीओई ने बच्चों की सुरक्षा के सबंध में स्कूलों को विस्तृत गाइडलाइन भेजी है।

इसमें साफ उल्लेख है कि किसी भी बच्चे को स्कूल क‌ी किसी भी खाली जगह का उपयोग नहीं करने दिया जाएगा। साथी ही आखिरी पीरियड खत्म होने पर टीचर तब तक क्लास नहीं छोड़ सकती जब तक कि सभी बच्चे बाहर नहीं आ जाते।

प्ले स्कूलों पर नहीं लागू होता कोई न‌ियम

विशेषज्ञों और टीचर्स का मानना है कि प्लेस्कूल बच्चों के सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित जगह नहीं है क्योंकि, यहां कोई नियम लागू नहीं होता। एक खाली कमरे में कोई भी आराम से प्लेस्कूल शुरू कर सकता है। लोगों की मांग है कि कॉमन स्कूलों की तरह ही प्लेस्कूलों को भी सुरक्षा मानकों के अधीन लाया जाए।

दिल्ली में दो दिन में लगातार प्लेस्कूलों में हुई वारदातों के बाद सामाजिक संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए स्कूलों को कड़े कदम उठाने के लिए कहा है।

इनकी मांग है कि स्कूल के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। बच्चों को कहीं भी अकेले जाने की इजाजत न दी जाए।  बच्चों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने वाले एक वकील अशोक अग्रवाल का मानना है कि स्कूल के प्रिंसिपल का बच्चों से संबंध ऐसा होना चाहिए कि वह अपनी कोई भी परेशानी बेझिझक उनसे कह सके।

दिल्ली के लिए नया नहीं है ये सबकुछ

यह पूरा साल बच्चों के यौन शोषण का शिकार होने की घटनाओं का साक्षी रहा है। जिनमें से कुछ का सिलसिलेवार ब्योरा नीचे देखा जा सकता है...

1. 28 अगस्त को पूर्वी दिल्ली के एक नामी स्कूल की दस साल की छात्रा का उसके कैब ड्राइवर ने यौन शोषण किया।
2. 16 अगस्त को हौज खास के स्कूल में चार साल की बच्ची को कैब ड्राइवर ने अपनी हवस का शिकार बनाया।
3. 14 अगस्त को 5 साल की एक बच्ची का उसी के स्कूल के क्लास 12वीं के छात्र ने रेप किया।
4. 29 अप्रैल को जहांगीरपुरी के एक सरकारी स्कूल की पांच ल‌ड़कियों से उनके टीचर ने रेप किया।
5. कुछ हफ्ते पहले ही दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास स्थित एक सरकारी स्कूल में टीचर ने स्कूल कैंपस में ही छात्र के साथ कुकर्म किया।

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध के मामलों के बाद यूनिसेफ ने बच्चों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए एक कैंपेन लॉन्च किया है।
विज्ञापन

यून‌िसेफ ने बच्चों के यौन शोषण को रोकने के ‌ल‌िए छेड़ी मुह‌िम

यूनिसेफ की इस मुहिम में उसने खेल और एंटरटेनमेंट जगत की कुछ खास हस्तियों को अपने साथ शामिल किया है। यूनिसेफ ने अपने वक्तव्य में कहा है कि यह मुहिम लोगों को हिंसा के अलग-अलग रूपों के बारे में जानकारी देने के‌ लिए शुरू किया गया है। इस कैंपेन में यौन शोषण, मानसिक शोषण और बाल विवाह के ‌खिलाफ जागरूकता भी शामिल है।

यूनीसेफ का कहना है‌ कि उनके इस मुहिम में करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा, राहुल बोस, माधुरी दीक्षित नेने और फरहान अख्तर के साथ ही खेल जगत के मशहूर सितारे विरेंद्र सहवाग और सायना नेहवाल भी शामिल हैं।

यूनीसेफ के अनुसार भारत में 21 प्रतिशत लड़कियां 15 साल की उम्र में शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं। वहीं 15 से 19 साल तक की 13 प्रतिशत लड़कियां यौन शोषण का शिकार होती हैं। यूनीसेफ ने लोगों से इस कैंपेन को सोशल मीडिया पर भी सपोर्ट करने का आग्रह किया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें