गिरोह में यश जैन, प्रीति जैन के अलावा जैद खिलजी, निखिल अरोड़ा, अकमार हैदरी, सद्दाम और नूर फातिमा शामिल थे। गिरोह का संचालक प्रीति जैन उर्फ ड्रग वाली आंटी कर रही थी। इंदौर पुलिस की गिरफ्तारी के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह व अन्यों की टीम यश की तलाश करती रही। वह लगातार पुलिस को चकमा देता रहा।
इस बीच इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह की टीम को खबर मिली कि आरोपी पश्चिम विहार के एक फ्लैट में छिपा हुआ है। टीम ने वहां छापेमारी करने के बाद आरोपी को दबोच लिया। आरोपी ने करीब दस माह पूर्व अपार्टमेंट में एक व्यक्ति की मदद से फ्लैट किराए पर लिया था। यहां रहकर वह कार खरीदने-बचेने का काम कर रहा था। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह प्राइवेट पायलट है।
इंदौर में पढ़ाई के दौरान वह कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ले रहा था, लेकिन चोट लगने की वजह से उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इससे पूर्व वह प्राइवेट पायलट का लाइलेंस ले चुका था। बाद में उसने एमबीए करने के बाद उसने नौकरी की। नशे की लत लगने की वजह वह मादक पदार्थों का धंधा करने लगा। बाद में यश की मां एमडीएमए, कोकीन और दूसरे मादक पदार्थों का धंधा करने लगी। पुलिस यश से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।