आगामी 24 दिसंबर को मेट्रो का परिचालन दिवस है। 24 दिसंबर 2002 में पहली बार मेट्रो का परिचालन शुरू हुआ था। सफलता के 14 साल पूरे होने के साथ अपने तय समय में काम पूरा करने वाली मेट्रो पहली बार अपने तीसरे चरण के निर्माण में लेटलतीफी का नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है।
तीसरे चरण की जिन लाइनों का डेडलाइन दिसंबर 2016 में पूरा होना था वहां अभी तक निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है। इसमें तीन लाइनें ऐसी हैं, जिनकी जमीन विवाद के कारण अभी तक नई डेडलाइन तय नहीं हो पाई है। फेज तीन में कुल 160.5 किलोमीटर का निर्माण होना है। अभी तक इसमें 23 किलोमीटर ही ऑपरेशनल हो पाया है। बड़ी लाइनों पर कुछ-कुछ सेक्शन पर ट्रायल चल रहा है।
मजलिस पार्क से शिव विहार लाइन
तीसरे चरण की यह पिंक लाइन मेट्रो की सबसे बड़ी लाइन है। 58.59 किलोमीटर लंबी इस लाइन का नवंबर 2016 तक महज 89.60 फीसदी काम पूरा हुआ है। इस लाइन पर 39.47 किलोमीटर एलिवेटेड और 19.11 किलोमीटर भूमिगत लाइन है, जिसपर कुल 38 स्टेशन हैं। इस लाइन पर तीन जगहों मायापुरी, त्रिलोकपुरी और हसनपुर गांव 1755 वर्गमीटर जमीन को लेकर विवाद है। इसके चलते इस लाइन की नई डेडलाइन तय नहीं है।
हालांकि मेट्रो की मानें तो मायापुरी का विवाद खत्म हो गया है। अब इस लाइन के एक सेक्शन मजलिस पार्क से मायापुरी के बीच अप्रैल 2017 और मायापुरी से लाजपत नगर के बीच जुलाई 2017 तक ट्रायल का लक्ष्य रखा है।
जनकपुरी से बॉटेनिकल गार्डन
तीसरे चरण की यह मजेंटा लाइन दूसरी सबसे बड़ी 34.27 किलोमीटर की लाइन है। नवंबर 2016 तक इस लाइन पर 97.54 फीसदी का काम पूरा हो चुका है। इसमें 10.46 किलोमीटर एलिवेटेड और 23.80 भूमिगत लाइन है। इसपर कुल 23 स्टेशन है। इस लाइन पर कालिंदी कुंज पर 3441 वर्गमीटर जमीन को लेकर विवाद था जो कि खत्म हो गया है। अब इस लाइन के दो बड़े सेक्शन जनकपुरी से टी-वन आईजीआई एयरपोर्ट के बीच 10 किलोमीटर पर बीते बुधवार को और कालकाजी मंदिर से बॉटेनिकल गार्डन के बीच 13 किलोमीटर पर अक्टूबर से ट्रायल चल रहा है। इस लाइन पर अप्रैल 2017 तक ट्रायल चलेगा। उसके बाद लाइन खुलेगी।
मुंडका से बहादुरगढ़ लाइन
यह लाइन दिल्ली से बाहर बहादुरगढ़ तक जा रही है। कुल 11.18 किलोमीटर लंबी यह लाइन पूरी एलिवेटेड है। कुल 7 स्टेशन हैं। अक्टूबर तक 83.90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कुछ जगहों पर इस लाइन के लिए जमीन की समस्या है। इसे लेकर इसका काम लेटलतीफ चल रहा है। मेट्रो के मुताबिक जमीन विवाद के कारण अभी तक नई डेडलाइन तय नहीं हुई है। सूत्रों की मानें तो इस लाइन पर 5000 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है। जब तक जमीन नहीं मिल जाती तब तक मेट्रो नई डेडलाइन तय करने की स्थिति में नहीं है।
द्वारका-नजफगढ़ लाइन
द्वारका से आगे नजफगढ़ तक इस लाइन का काम भी देरी से चल रहा है। 4.29 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर अक्तूबर तक कुल 65.30 फीसदी काम हुआ है। सितंबर 2012 में इसे मंजूरी मिली थी। बताया जा रहा है कि यहां भी 292 वर्गमीटर जमीन मेट्रो को नहीं मिल रही है। जमीन नहीं मिलने कारण इसकी नई डेडलाइन तय नहीं की जा सकी है। जबकि मंजूरी मिले चार साल हो गया है। इसपर कुल कुल तीन स्टेशन हैं जिसमें 2.29 एलिवेटेड और 1.54 किलोमीटर अंडरग्राउंड है।
केंद्रीय सचिवालय से कश्मीरी गेट
यह वायलेट लाइन का एक्सटेंशन पार्ट हैै। इसमें 9.37 किलोमीटर भूमिगत लाइन है। इसपर कुल 07 स्टेशन है, जिसका अक्तूबर तक 97.86 फीसदी काम पूरा हो चुका है। दिसंबर तक इस लाइन को परिचालन शुरू करना था। इसके केंद्रीय सचिवालय से आईटीओ के बीच 3.03 किलोमीटर पर ऑपरेशन शुरू भी हो चुका है। बाकी आईटीओ से कश्मीरी गेट जिसे हेरिटेज लाइन के नाम से जानते हैं उसपर ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है कि जनवरी 2017 के अंत तक इसपर परिचालन शुरू हो जाएगा। निर्माण के दौरान तकनीकी कारणों से इसके काम में थोड़ी देरी हुई।
जहांगीरपुरी से समयपुर बादली लाइन
यह यलो लाइन (गुडग़ांव से जहांगीरपुरी) की एक्सटेंशन लाइन हैै। 4.37 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर तीन स्टेशन है। इसका काम पूरा हो चुका है। यह नवंबर 2015 से ऑपरेशनल है।
एस्कॉर्ट्स मुजेसर से बदरपुर
कुल 13.87 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर 9 एलिवेटेड स्टेशन हैै। इसका काम पूरा हो चुका है। यह सितंबर 2015 से ऑपरेशन है।
फैक्ट फाइल:
213 किलोमीटर मेट्रो की लाइन ऑपरेशनल है।
160 किलोमीटर मेट्रो तीसरे चरण में बनेगी।
23 किलोमीटर अभी तक ऑपरेशनल हुआ है।
30 लाख से ज्यादा लोग रोजाना सफर करते हैं।
44 लाख यात्री हो जाएंगे फेज तीन पूरा होने पर।