पंख फैलाए खुले आसमान में गोता लगा रहे परिंदे हमें आजादी का अहसास दिलाते हैं, मगर आम लोगों का आजादी का जश्न इन बेजुबानों की जिंदगी खतरे में डाल रहा है। हम शौक से पतंग उड़ाते हैं और ये बेचारे मारे जाते हैं। 15 अगस्त के आसपास हर साल हजारों पक्षी पतंग के मांझे से घायल होते हैं।
यह बात कितनी गंभीर है इसका अंदाजा आप इस तथ्य से लगा सकते हैं। बीते साल 2500 से ज्यादा जख्मी पक्षी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के विजयानंद सूरी जैन धर्मार्थ पक्षी अस्पताल में लाए गए। ये परिंदे भी वो हैं, जिन्हें कोई भला आदमी अस्पताल तक पहुंचा देता है। पूरे एनसीआर में कितने पक्षी घायल होते होंगे इसकी कोई गिनती नहीं है।