राजस्थान, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश से आए लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटने पर जताई चिंता, चुनाव आयोग से नाम जोड़ने और शिकायतों के समाधान की मांग
सचिन कुमार
नई दिल्ली। कोई राजस्थान से पहुंचा, कोई हरियाणा से, तो कोई बिहार और मध्य प्रदेश से। पृष्ठभूमि अलग थी, लेकिन शुक्रवार को दिल्ली में सभी की लड़ाई एक थी-अपने वोट का अधिकार बचाने की। पीपल अगेंस्ट एसआईआर के बैनर तले निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हुए, जिन्होंने मतदाता सूची से नाम कटने की शिकायत की। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दिल्ली में रहने के बावजूद मतदाता सूची में उनके नाम नहीं हैं।
मार्च की खास बात यह रही कि इसमें संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ वे लोग भी पहुंचे, जो खुद नाम कटने की परेशानी झेल रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से आए इन लोगों की शिकायतें भले एक जैसी थीं, लेकिन उनके सवाल भी कई थे। उनका कहना था कि दिल्ली में रहने के बावजूद नाम मतदाता सूची से क्यों हटाए गए और उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए क्या करना होगा।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने से वे चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। उनकी मांग थी कि पात्र मतदाताओं के नाम हटने के मामलों की जांच हो और गलती होने पर उन्हें तुरंत सुधारा जाए। साथ ही, नाम की स्थिति जानने और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान बनाई जाए, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अलग-अलग राज्यों से आए, लेकिन लड़ाई एक
राजस्थान, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों से जुड़े लोगों ने मार्च में हिस्सा लिया। महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को सामने रखा। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और चुनाव आयोग से शिकायतें सुनने की मांग की।
लोग बोले
जब मुझे पता चला कि मतदाता सूची में मेरा नाम नहीं है, तो मैं काफी परेशान हुआ। समझ नहीं आ रहा कि मेरा वोट क्यों काटा गया। जब हम वोट डालने के पात्र हैं तो हमारा नाम सूची में होना चाहिए।
-अमरनाथ
हम दिल्ली में रहते हैं और यहीं वोट डालना चाहते हैं, लेकिन मतदाता सूची में हमारा नाम नहीं है। हमें समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हुआ। वोट हमारा अधिकार है और इसे लेकर हम परेशान हैं।
-राजेश
मतदाता सूची में नाम नहीं होने से ऐसा लग रहा है कि हमारा अधिकार हमसे छिन गया है। हम चाहते हैं कि चुनाव आयोग हमारी शिकायत सुने और बताए कि नाम क्यों हटाया गया। अगर गलती हुई है तो उसे ठीक किया जाए।
-दुर्गा प्रसाद
हम हरियाणा से आए हैं। हमारी मांग है कि एसआईआर रद्द किया जाए और देश में निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
-दलजीत सिंह डागर
13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। इसका विरोध दर्ज कराने के लिए हम अलीगढ़ से दिल्ली आए हैं।
-शशिकांत, किसान नेता
गांधी हमारे आदर्श हैं और जेपी ने गांधी के आदर्शों पर चलकर सरकार को आईना दिखाया था। हम भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपना विरोध जता रहे हैं।
-टीना शुभमूर्ति
संविधान का अनुच्छेद 19 हमें शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, लेकिन सरकार हमारी आवाज दबा रही है।
- परी
मैं महाराष्ट्र का एक कलाकार हूं। एसआईआर के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में तिरंगा बनकर आता हूं। पुलिस को मुझे हिरासत में लेने के साथ तिरंगे को भी हिरासत में लेना पड़ेगा।
-अक्षय माली