ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) के फ्लैट खरीदारों का एक और साल अपने आशियाने के इंतजार में निकल गया। विवादों से उबरने के बाद यहां फ्लैटों का निर्माण शुरू तो हो चुका है, लेकिन एकाध को छोड़कर बाकी का पजेशन 2015 से पहले नजर नहीं आ रहा।
जबकि लॉन्चिंग के समय फ्लैट की कीमत करीब 1800 रुपये प्रति वर्ग फुट से शुरू हुई थी, जो अब 3500 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है।
2009 में नोएडा एक्सटेंशन की शुरुआत हुई थी। उस समय फ्लैटों की बुकिंग कराने वालों को 2013 के अंत तक पजेशन देने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन जमीनी विवाद चलते करीब डेढ़ साल तक निर्माण कार्य रुका रहा। मुआवजा और आवासीय भूखंड की मांग को लेकर शुरू हुआ विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जिससे युद्ध स्तर पर चल रहा निर्माण कार्य ठप पड़ गया।
कोर्ट के आदेश पर प्राधिकरण और किसानों के बीच सहमति बनी और फिर से निर्माण कार्य शुरू हुआ। 2012 मध्य से फिर नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी।
विवाद भले ही डेढ़ साल का रहा हो, लेकिन इसने नोएडा एक्सटेंशन को काफी पीछे धकेल दिया। 2013 तक लोग अपने फ्लैटों में रहने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अभी लगभग एक साल और इंतजार करना होगा। कुछ बिल्डर तो ऐसे हैं, जो 2015 तक पजेशन दे पाएंगे।
फ्लैट खरीदारों को पजेशन में देरी के अलावा कई और मुद्दों पर झुकना पड़ा। प्राधिकरण ने एफएआर को 2.75 से बढ़ाकर 3.50 कर दिया गया। एफएआर बढ़ने के बाद अधिक फ्लैट बनाने के चक्कर में फ्लैट खरीदारों को पजेशन पाने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
नहीं कर रहे शिफ्ट
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक जमीनी विवाद के चलते चार बड़ी कंपनियों ने अपने एक-एक प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था। उनके बायर्स को कहीं और शिफ्ट करने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक उनको शिफ्ट नहीं किया गया है, सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
एफआईआर भी दर्ज
फ्लैटों की बुकिंग और प्रोजेक्ट रद्द करने के बाद किसी और जगह में खरीदारों को शिफ्ट न करने पर नेफोवा व नेफोमा ने बिसरख थाने में मामला भी दर्ज कराया है। हालांकि अभी तक मामले में किसी पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। लोग सिर्फ मुंह ताके इंतजार ही कर रहे हैं।