जहां एक ओर सरकार लोगों को सुविधा देने का वादा कर रही है और पूरी दिल्ली में 42 स्थानों पर जन कल्याण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन क्या ये शिविर लोगों की समस्याओ का सच में समाधान कर रहे हैं या फिर सरकार की एक पीआर एक्सरसाईज है। यमुनापार में जब इस बात कि पड़ताल की गई तो इन शिविरों में कई खामियां नजर आईं।
किसी शिविर में कर्मचारी नदारद रहे तो किसी में स्टॉफ लोगों को टरकाते नजर आए। हद तो तब हो गई जब गोकुलपुर में लगे शिविर की कमान संभाल रहीं एसडीएम भी वहां नजर नहीं आईं। जिसके बाद लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और लगाए गए इन शिविरों को जमकर कोसा। कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि इन शिविरों मे काम तो हो नहीं रहा है बस नेताओं के लिए फोटो खिंचवाने का स्पॉट बनकर रह गया है।
-अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनबाने आए अजय कुमार ने बताया कि उनसे वहां मौजूद कर्मचारी ने कहा कि वह सिर्फ यहां गाइड करने के लिए बैठे हैं आपका काम यहां न होकर डीसी ऑफिस में ही होगा। जब इस शिविर में कुछ होना ही नहीं है तो लगाया ही क्यों। क्या पब्लिक को परेशान करने और फोटो खिचवाने के लिए।
-बीना शर्मा ने बताया कि इस शिविर के प्रचार में योजनाऐं इतनी सारी बताई जा रही हैं और है कुछ भी नही यहां। कोई जानकारी देने को भी तैयार नहीं। पता नहीं ऐसे कैंप लगाए ही क्यों जाते है।
-अभिषेक ने बताया कि वह आय प्रमाण पत्र बनवाने आए थे लेकिन यहां न फार्म जमा हो रहा है न एप्लाई कर सकते है तो सरकार ने क्यों लगाया ये कैंप।
-मीना ने बताया कि वह यहां पिंक कार्ड और खाता खुलवाने आईं थी। कोई सुनवाई हो ही नहीं रही। शिविर वाले कम से कम ये ही बता तो दें कि कैसे बनेगा पिंक कार्ड।
-दीपक शर्मा जिनकी ड्यूटी गोकलपुर स्थित जनकल्याण शिविर में लगाई गई थी। उन्होंने बताया कि उनको सिर्फ प्रचार के लिए रखा गया है। समाधान के लिए आईटीओ स्थित विकास भवन आना होगा।
एसडीएम गोकलपुर, पूनम से जब पूछा गया की आप कैंप में मौजूद क्यों नहीं थीं तो उन्होंने शाम 5 बजकर 10 मिनट पर बताया कि वह एक मिटिंग में थी वहां से आने के बाद अब वह कैंप में ही हैं।