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एनसीआर में अजीब है पेइंग गेस्ट की कहानी

Fri, 21 Feb 2014 05:05 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेइंग गेस्ट के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं, लेकिन 80 फीसदी पीजी संचालक इनमें से एक भी नियम पूरा नहीं कर पाते।
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यही नहीं, पुलिस भी अवैध पीजी को सुरक्षा में सबसे बड़ा छेद मानती है। इसके बावजूद ऐसे पीजी का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। बिना अधिकारिक मंजूरी के घरों में ही अवैध तरीके से चल रहे ये पीजी सुविधा देने के नाम पर विद्यार्थियों से मुंहमांगा किराया वसूल रहे हैं।

शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले दाखिलों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल में सीटों की संख्या बेहद कम है। छात्रों की इसी मजबूरी का फायदा पीजी वाले उठा रहे हैं।
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दिल्ली में हर साल आते हैं 4 लाख स्टूडेंट

राजधानी में हर साल लगभग 4 लाख से अधिक छात्र विश्वविद्यालयों, कोचिंग सेंटर या अन्य शैक्षिक संस्थाओं में दाखिला लेते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के 70 फीसदी स्टूडेंट यूपी, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर पूर्वी राज्यों और उत्तराखंड से आते हैं।

विवि में सीमित संख्या में हॉस्टल होने के कारण ज्यादातर विद्यार्थियों को आसपास के इलाकों में पीजी में रहना पड़ता है। प्रीत विहार और लक्ष्मी नगर में चल रहे कोचिंग सेंटरो में सीए और सीएस की कोचिंग पढ़ने आने वाले हर साल करीब 50 हजार नए छात्रों को पीजी की जरूरत पड़ती है।

उत्तरी दिल्ली या दक्षिणी दिल्ली में एक रूम में दो से तीन बेड होते हैं। छात्रों से प्रति बेड आठ हजार से 20 हजार रुपये वसूले जाते हैं। हर साल इनमें पांच सौ रुपये तक की बढ़ोत्‍तरी हो जाती है।

शहर की जरूरत है पीजी लेकिन...

घरों में पेइंग गेस्ट (पीजी) की सुविधा बेशक इस शहर की जरूरत है, लेकिन अवैध रूप से चल रही इस गतिविधि से पड़ोसियों को परेशानी होती है।

नोएडा में कंपनियों की भरमार है, इसलिए युवा यहां रोजगार की तलाश में आते हैं। जबकि उतनी मात्रा में हॉस्टल नहीं है। किराए का मकान लेने पर खाने-पीने की दिक्कत होती है।

लिहाजा होटल पर खाने या खुद बनाने के झंझट से छुटकारा पाने को पीजी ले लेते है। शहर भर के मकानों की संख्या एक लाख है तो उसके हिसाब एक हजार घरों में पीजी चल रहे हैं।

यहां आज भी चल रहा है खुला कारोबार

गुड़गांव में हरियाणा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने पिछले साल जनवरी माह में सेक्टर एरिया के भीतर पीजी चलाने के लिए अधिसूचना जारी की थी।

इस नीति के आने से पीजी संचालकों में खासा हड़कंप मचा था। हुडा ने भी दावा किया था कि एक माह के भीतर जो तय नियमों की पालना सुनिश्चित नहीं करता, उनके पीजी पर ताला लटका दिया जाएगा।

लेकिन एक साल से अधिक का समय गुजर गया है,इसके बावजूद न तो किसी पीजी संचालक ने तय नियमों की पालना सुनिश्चित की और न ही किसी पीजी पर ताला लटका। आज भी पीजी उसी तरह चल रहे हैं।

फरीदाबादी तो एक कदम और आगे!

फरीदाबाद में हुडा और नगर निगम के रिकॉर्ड में एक भी पीजी (पेइंग गेस्ट) रजिस्टर्ड नहीं है। यानी सब के सब अवैध रूप से चल रहे हैं। न तो इन दोनों विभागों की नजर इधर जाती है और न ही पुलिस की।

ताज्जुब की बात ये है कि कुछ पीजी संचालकों ने बाकायदा इंटरनेट पर विज्ञापन डाले हुए हैं, जिसमें कमरे की फोटो भी दी गई है। बाकायदा बताया गया है कि इंटरनेट फ्री है। क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी। इसके बावजूद इन्हें टैक्स के दायरे में नहीं लिया और न ही रजिस्टर्ड किया गया।

शहर के सेक्टरों से लेकर गांव तक में यह काम धड़ल्ले से चल रहा है। लोग कारोबार के रूप में पीजी चला रहे हैं, जबकि अब तक इनके लिए सर्वे भी नहीं हुआ।
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क्या है नियम?

नोएडा में मिक्स लैंड यूज से मिल सकती है छूट
पीजी को नियमित करने के लिए पहले भी प्रस्ताव बना है। उनमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति घर में पीजी चलाता है तो प्राधिकरण को व्यावसायिक शुल्क अदा कर अनुमति ले सकता है। इससे पहले उसे आरडब्ल्यूए से एनओसी व स्थानीय पुलिस को सूचना देनी होगी।

यह प्रस्ताव क्रियान्वित नहीं हो सका, लेकिन हाल ही में प्राधिकरण ने मिक्स लैंड यूज पॉलिसी को बोर्ड से मंजूरी दी है। इसमें गेस्ट हाउस को भी अनुमति दी गई है।

यहां रजिस्ट्रेशन का है प्रावधान
गुड़गांव फरीदाबाद में हुडा अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टरों में यदि कोई कमर्शियल एक्टिविटी शुरू की जाती हैं, तो सबसे पहले हुडा कार्यालय में 5,000 रुपये देकर उसका रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है।

इसके बाद वार्षिक कम से कम 50 हजार रुपये फीस देकर उसका रिनुअल कराया जाता है। आज तक नगर निगम एवं हुडा क्षेत्र में एक भी पीजी रजिस्टर्ड नहीं है।
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