- महिला शिक्षक सुजाता मेहता की याचिका पर आया यह आदेश, जो निजी स्कूल में 1984 से काम कर रही थीं और 30 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुईं
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन को सरकारी स्कूलों के समान सातवें वेतन आयोग के हिसाब से तय करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने कहा कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और दूसरे फायदे सरकारी स्कूलों के इसी दर्जे के कर्मचारियों पर लागू होने वाले अधिकारों से कम नहीं होंगे। फीस न बढ़ाने की दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
यह आदेश एक महिला शिक्षक सुजाता मेहता की याचिका पर आया, जो निजी स्कूल में 1984 से काम कर रही थीं और 30 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त हुईं। हालांकि, याचिका की सुनवाई के दौरान 26 दिसंबर 2021 को उनकी मृत्यु हो गई थी। अदालत ने उनके कानूनी वारिसों को शिक्षिका का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया। निजी स्कूल ने तर्क दिया कि दिल्ली सरकार की फीस बढ़ोतरी पर रोक के कारण वे अतिरिक्त खर्च नहीं उठा सकते। अदालत ने यह तर्क खारिज कर दिया और कहा कि स्कूल चलाना है तो नियमों का पालन करना होगा।