एक पाइप गले में सांस लेने के लिए लगाई। सूत्रों की मानें तो जहां पाइप लगी थी, उसी के आसपास और सिर में कुछ दिन बाद 2 सितंबर को जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर ने मक्खियों के अंडे देखे। इसका जिक्र मरीज के कार्ड पर भी किया। स्थिति यह रही कि जूनियर डॉक्टर की इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
एक डॉक्टर ने बताया कि लिखित में जानकारी देने के बाद भी मरीज को देखने अन्य विभाग से कोई नहीं आया। इसके बाद मरीज के शरीर से गंध आने लगी। पूरे आईसीयू में गंध फैलने के बाद तत्काल डॉक्टर ने फिर से अलर्ट किया। मरीज में कीड़े पड़ने की बात पूरे अस्पताल में फैल गई। आनन-फानन में डॉक्टर मरीज को देखने आए और मक्खियों के अंडों से 30 कीड़े निकाले। बताया जा रहा है कि कीड़े निकालने के बाद जब मरीज की पड़ताल शुरू हुई, तो उसकी पहचान हरिचंद के रूप में हुई है।
इस मामले को अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय बहल ने गंभीर बताते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कई बार मरीज जब आते हैं तो इस तरह का संक्रमण साथ लाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर जब मरीज संक्रमण के साथ अस्पताल आता है, तो उसकी सही तरीके से ड्रेसिंग क्यों नहीं की जाती। आखिर 15 से 20 दिन के बाद ही कीड़े पड़ने का इंतजार क्यों किया जाता है।