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शर्मनाक! आईसीयू में मरीज के जख्मों में पड़े कीड़े, ऐसे खुली राजधानी के बड़े अस्पताल की पोल

Sat, 15 Sep 2018 05:01 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर
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दिल्ली सरकार के सुश्रुत ट्रॉमा अस्पताल ने एक बार फिर चिकित्सीय जगत को शर्मसार कर दिया है। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज की पर्याप्त देखरेख नहीं होने की वजह से उसके जख्मों पर कीड़े पड़ गए। ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर के बताने पर भी जख्मों से मक्खियों के अंडे साफ नहीं किए गए। 

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इसका परिणाम यह रहा कि अंडों से कीड़े बाहर आने लगे और मरीज के शरीर से आईसीयू में तेज गंध फैलने लगी। गौर करने वाली बात है कि अप्रैल में इसी अस्पताल के एक डॉक्टर ने सिर पर चोट लगे मरीज के पैर का ऑपरेशन कर दिया था।

मरीज के अस्पताल के कार्ड के अनुसार, 14 अगस्त को 53 वर्षीय मरीज को सिविल लाइन स्थित सुश्रुत ट्रॉमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिर पर चोट लगने की वजह से मरीज बेहोश था। उसके साथ कोई तीमारदार नहीं था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने आईसीयू में उसे भर्ती कर लिया। 

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प्रबंधन को भनक नहीं, बाहर से संक्रमण की शंका

एक पाइप गले में सांस लेने के लिए लगाई। सूत्रों की मानें तो जहां पाइप लगी थी, उसी के आसपास और सिर में कुछ दिन बाद 2 सितंबर को जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर ने मक्खियों के अंडे देखे। इसका जिक्र मरीज के कार्ड पर भी किया। स्थिति यह रही कि जूनियर डॉक्टर की इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
      
एक डॉक्टर ने बताया कि लिखित में जानकारी देने के बाद भी मरीज को देखने अन्य विभाग से कोई नहीं आया। इसके बाद मरीज के शरीर से गंध आने लगी। पूरे आईसीयू में गंध फैलने के बाद तत्काल डॉक्टर ने फिर से अलर्ट किया। मरीज में कीड़े पड़ने की बात पूरे अस्पताल में फैल गई। आनन-फानन में डॉक्टर मरीज को देखने आए और मक्खियों के अंडों से 30 कीड़े निकाले। बताया जा रहा है कि कीड़े निकालने के बाद जब मरीज की पड़ताल शुरू हुई, तो उसकी पहचान हरिचंद के रूप में हुई है।

इस मामले को अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय बहल ने गंभीर बताते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कई बार मरीज जब आते हैं तो इस तरह का संक्रमण साथ लाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर जब मरीज संक्रमण के साथ अस्पताल आता है, तो उसकी सही तरीके से ड्रेसिंग क्यों नहीं की जाती। आखिर 15 से 20 दिन के बाद ही कीड़े पड़ने का इंतजार क्यों किया जाता है।
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