कुछ दिन पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सिफारिशी पत्र लिखने के बाद भी एम्स ट्रामा सेंटर से मरीज की इच्छा के बगैर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी लेकिन मरीज ने अस्पताल परिसर छोड़ा नहीं है और दूसरे दिन अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई।
ऐसा ही एक मामला लोक नायक अस्पताल में सामने आया है। मरीज को जबरन अस्पताल से छुट्टी देने का आरोप लगा है और अस्पताल परिसर में ही मरीज की मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला नारायण (22) को छह जून को लोक नायक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उसे 17 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मरीज के परिजन नहीं चाहते थे कि फिलहाल अस्पताल से छुट्टी की जाए, लेकिन डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी। बावजूद परिजन मरीज को लेकर अस्पताल परिसर में ही पड़े रहे। शुक्रवार दोपहर मरीज की मौत हो गई।
परिजनों ने अस्पताल-प्रशासन और इलाज करने वाले डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर अस्पताल से छुट्टी नहीं करते तो मरीज को बचाया जा सकता है। इस संबंध में पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है।
परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक नारायण ब्रेन टीबी से पीड़ित था और उसे इससे पहले भी लोक नायक अस्पताल में उसका इलाज किया गया था। नारायण की तीन बहन और मां है। घर में कमाने वाला कोई नहीं है।
लोक नायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ रामजी ने बताया कि मरीज कई तरह की बीमारी से पीड़ित था। दिमागी टीबी के अलावा नशे का लत भी थी। इलाज और दवा के बाद भी उसके बचने की उम्मीद नहीं के बराबर थी।
समाजिक संस्था से भी मदद करने के लिए संपर्क किया गया लेकिन कुछ हो नहीं पाया और मरीज की शुक्रवार दोपहर अस्पताल के प्रतिक्षालय में मोत हो गई। शव को अस्पताल के एंबुलेंस से उसके पैतृक निवास पहुंचाया गया।
टीबी रोगी की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप
नोएडा सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में शुक्रवार दोपहर बाद टीबी रोगी की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जानकारी के मुताबिक निठारी निवासी विजय (36वर्ष) को टीबी में हालत बिगड़ने के चलते परिजन बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल लेकर आए थे। शुक्रवार दोपहर बाद विजय की मौत हो गई।
विजय केछोटे भाई संदीप ने बताया कि सुबह की शिफ्ट के डॉक्टरों ने ठीक से इलाज शुरू किया। दोपहर और रात की शिफ्ट के डॉक्टरों ने उपचार तो दूर मरीज के पास तक जाने से मना कर दिया। काफी विनती के बाद भी डॉक्टर नहीं पसीजे। इलाज नहीं मिलने की वजह से उनकी मौत हो गई।
शुक्रवार को दोपहर में इमरजेंसी में मौजूद डॉ. अभिषेक दुबे ने बताया कि मरीज को टीबी के साथ कई अन्य बीमारियां भी थी। मेडिकल हिस्ट्री से पता लगा कि जिस दिन वह अस्पताल आया था, उसी दिन उसे रेफर कर दिया गया था। परिजनों ने पूछने पर बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह उसे यहां से नहीं ले गए थे।