नई दिल्ली की अदालत ने गुजरात से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल को राहत देते हुए उनके व अन्य के खिलाफ एफआईआर का निर्देश देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पेश शिकायत के मद्देनजर पटेल पर कोई मामला नहीं बनता। याचिका में कहा गया था कि अहमद पटेल ने पुलिस व अन्य लोगों के साथ मिलकर जोरबाग स्थित कर्बला की जमीन पर कब्जे की कोशिश की थी।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने याचिका खारिज करते हुए उस दलील को मानने से इंकार कर दिया कि पुलिस ने पटेल के कहने पर 30 मार्च 2014 को कर्बला के प्रवेश द्वार बांस व टिन की दीवार बनाकर श्रद्धालुओं को नमाज के लिए जाने से रोका था।
अदालत ने कहा कि घटना वाले दिन पटेल केंद्रीय गृह मंत्री नहीं थे। वहीं इस केस में प्रस्तावित आरोपी पुलिसकर्मी अथवा दिल्ली पुलिस का कोई भी अधिकारी पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस तरह वह उनका आदेश मानने के लिए विवश नहीं थे। इसलिए इस याचिका को खारिज किया जाता है।
अदालत ने उन पुलिसकर्मियों पर भी एफआईआर का निर्देश देने से इंकार कर दिया, जिनपर श्रद्धालुओं का रास्ता रोकने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने यह फैसला कर्बला निवासी दिलावर अब्बास नकवी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया है।
याची ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 29 सितंबर 2017 के आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने भी याची की शिकायत पर एफआईआर का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। याची का आरोप है कि पटेल कर्बला में दरगाह शाह ए मरदन की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।