गुड़गांव में सीनियर सिटीजन (64) दिलीप अरोड़ा ने वर्ष 2009 में सेक्टर-69 स्थित यूनिटेक सनब्रिज में फ्लैट बुक कराया था। तब बिल्डर ने वादा किया था कि वह 2012 की तीसरी तिमाही में उन्हें फ्लैट का कब्जा दे देगा। मगर आज तक ऐसा नहीं हो सका है। करीब ढाई साल से वहां कंस्ट्रक्शन का काम बंद है। अरोड़ा बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन की गाढ़ी कमाई नए घर को पाने में लगा दी। इसके नहीं मिलने से वह आर्थिक और मानसिक तनाव में जी रहे हैं।
इसी प्रकार सेक्टर-103 में एएन बिल्डवेल के स्पायर वुड्स प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले रजनीश भी काफी परेशान हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2011 में फ्लैट बुक कराया था, जिसका पजेशन बिल्डर को अक्तूबर 2015 में देना था, मगर वह अपना वादा नहीं निभा रहा है। ऐसे कई और निवेशक है जो फ्लैट बुकिंग के बाद से अब तक लाखों रुपये बिल्डर को इस आस में दे चुके हैं कि उनके घर का सपना पूरा होगा, लेकिन बिल्डरों की मनमानी के कारण वह आज तक अधूरा है। अब निवेशकों को डर सता रहा है कि कहीं बिल्डर उनकी मेहनत की कमाई डकार न जाए।
साइबर सिटी बिल्डर विवाद का काफी बड़ा गढ़ है। आए दिन यहां किसी ने किसी बिल्डर के खिलाफ निवेशक अपनी आवाज बुलंद करते रहते हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे (एनपीआर) और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड सहित मानेसर और सोहना रोड कंस्ट्रक्शन के सबसे बड़े हब हैं। यहां करीब डेढ़ लाख से अधिक फ्लैट वर्ष 2006 से 2015 के बीच बुक हुए हैं। मगर इनका कब्जा खरीदारों को नहीं मिला है।
गुड़गांव में बिल्डर जब कोई रिहायशी परियोजना को लांच करता है, तब वह लोगों का कई प्रकार के सपने दिखाता है। वह यहां के कॉरपोरेट, आईटी सेक्टर और एयरपोर्ट से नजदीकी को भुनाता है। इसी चकाचौंध में लोग बिल्डरों की बातों में आकर प्रोजेक्ट में निवेश कर देते हैं। फ्लैट खरीदने वालों का कहना है कि क्या अपने घर के सपने को पूरा करना कोई गुनाह है। अपने जीवन भर की कमाई फ्लैट में लगा देने के बाद भी उन्हें इसके मिलने की उम्मीद नहीं है। कई साइट ऐसे हैं, जहां पर काम पूरी तरह से ठप है। गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड स्थित यूनिटेक स्केप परियोजना में निवेश करने वालों का कहना है कि 95 फीसदी पेमेंट कर दिया है, मगर अब तक उन्हें कब्जा नहीं मिला है।
खरीदारों पर दोहरी मार
फ्लैट पर कब्जा नहीं मिलने से खरीदारों पर दोहरी मार पड़ रही है। हजारों लोग ऐसे हैं, जिन्हें मकान का किराया और बैंक की ईएमआई दोनों चुकानी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें अपनी कई जरूरतों को दरकिनार करना पड़ रहा है। कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें इसके लिए उधार तक लेना पड़ रहा है। बिल्डरों की कारगुजारी से परेशान लोगों का कहना है कि गुडग़ांव जैसे महंगे शहर में मकान का किराया और ईएमआई चुकाना काफी भारी पड़ रहा है। परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी इस कारण दिक्कत होने लगी है।
खरीदारों की जुबानी उनकी कहानी
यूनिटेक सनब्रिज की रिहायशी परियोजना में निवेश बुरी तरह से फंस गया हूं। सरकारी बैंक से रिटायर होने के बाद पेंशन से काम चल रहा है। इस पेंशन से ईएमआई देना काफी मुश्किल हो रहा है। बढ़ती आयु के कारण बीमारी भी परेशान कर रही है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण गुड़गांव छोड़कर कानपुर के पुराने 550 स्क्वायर फीट के मकान में रहना पड़ रहा है। सरकार से गुजारिश है कि वह उनका घर उन्हें जल्द से जल्द दिलाए।-दिलीप अरोड़ा
द्वारका एक्सप्रेसवे के सेक्टर-103 स्थित स्पायर वुड्स रिहायशी परियोजना में पैसा लगाना काफी मुश्किल भरा हो रहा है। बिल्डर अपना वादा नहीं निभा रहा है। साइट पर बिल्डर ने कंस्ट्रक्शन का काम पूरी तरह से बंद कर दिया है।-रजनीश
गुड़गांव में बिल्डर अपना वादा नहीं निभा रहे हैं। छह-छह साल से प्रोजेक्ट लटका हुआ है। सेक्टर-69 में यूनिटेक बिल्डर की परियोजना में निवेश करना काफी महंगा साबित हो रहा है। किराये के मकान में रहकर गुजारा करना पड़ रहा है। ईएमआई और किराये के बोझ ने जीवन की चाल को ही बिगाड़ कर रख दिया है।-शाशा क्रूज
गुड़गांव का नाम बिल्डरों की धोखाधड़ी में बदनाम है। एकाध बिल्डर को छोड़ दिया जाए तो हर किसी के प्रोजेक्ट में विवाद है। शहर में यूनिटेक के जितने भी प्रोजेक्ट हैं, उन सभी में विवाद है। उसके सेक्टर-68, सेक्टर-86 और सेक्टर-103 परियोजना काफी विवादित हैं।-संजय शर्मा (रियल एस्टेट की धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले)