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अफसरों ने रिश्तेदारों को दिया एशियन गेम्स का टिकट

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भारत के पैरा खिलाड़ियों ने पैरालंपिक कमिटी में चले आ रहे भ्रष्टाचार के एक बड़े मुद्दे का खुलासा किया है। पैरा खिलाड़ियों का आरोप है कि पैरालंपिक कमिटी, पैरा एशियन गेम्स के दौरान खिलाड़ियों के साथ जाने वाले प्रशिक्षित रक्षकों की जगह अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों को भेजने वाली है।
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बता दें कि पैरालंपिक जल्द ही दक्षिण कोरिया के इचोन में एशियन गेम्स होने वाले हैं और खिलाड़ियों का कहना है कि इन खेलों में उनके साथ एस्कॉर्ट को न भेजकर कमिटी अपने नाते-रिश्तेदारों को भेजने वाली है।

आरोप है कि इन सभी का नाम एक्जिक्यूटिव कमिटी की लिस्ट में खिलाड़ियों के साथ लिख दिया गया है। एक लीक हुआ ड्राफ्ट बताता है कि पैरा एशियन गेम्स में जाने वाले खिलाड़ियों के नाम के साथ पीसीआई अधिकारी के ड्राइवर, कार्यालय में काम करने वाले लड़के, रियल एस्टेट दलाल, गैस एजेंसी के स्टाफ सहित अधिकारियों के करीबी मित्र का नाम भी शामिल है।
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ख‌िलाड़‌ियों की मदद की जगह करते हैं मौजमस्ती

पीसीआई अध्यक्ष राजेश तोमर का दावा है कि अभी अंतिम सूची तैयार नहीं की गई है। न ही कोई नाम मंत्रालय को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि लिस्ट में अगर कोई गैर-आधिकारिक नाम हुआ तो वह रक्षकों का ही होगा। जो उन खिलाड़ियों के साथ जाएंगे, जो गंभीर डिसएबिलिटी से जूझ रहे होते हैं।

पैरा‌ खिलाड़ियों के साथ किसी को भी रक्षक (एस्कॉर्ट) बनाकर भेजने की परंपरा बिल्कुल भी नई नहीं है। लंदन पैरालंपिक 2012 में भी पैरालंपिक खिलाड़ियों के कोच और परिवार के सदस्यों को खेल गांव में नहीं घुसने दिया गया था। उनकी जगह पर पीसीआई के 7 सदस्यों को जगह दी गई थी।

पैरा टेबल टेनिस प्लेयर प्रदीप राज ने 2012 में पीसीआई में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऑनलाइन याचिका दायर की थी। इस पर राज ने कहा कि जब उन्होंने यह याचिका डाली थी तब तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि इस बारे में कार्रवाई की जाएगी। पीसीआई वही काम दोबारा कर रही है।

जो लोग पैरा खिलाड़ियों के साथ भेजे जाते हैं वे उनका बिल्कुल भी खयाल नहीं रख सकते। राज आगे कहते हैं कि वो सभी केवल टूर का आनंद लेते हैं और वापस चले आते हैं। राज का आरोप है कि जिन लोगों के नाम लिस्ट में पाए गए हैं उन्हें पहले से ही अधिकारिक तौर पर मान्यता मिल गई है।
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अभी तक नहीं आयोज‌ित हुआ स्पेशल ट्रेन‌िंग कैंप

पीसीआई के अध्यक्ष तोमर का दावा है कि जिस खिलाड़ी ने ये बेबुनियाद आरोप लगाए हैं वह इसलिए हैं क्योंकि उसे या उसके परिवार को इसके ‌लिए नहीं चुना गया। पीसीआई केवल उन्हीं खिलाड़ियों को भेजता है जो मेडल ला सकें।

वैसे खेल मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कमिटी के सदस्यों से परिवार व मित्रों को टीम अधिकारियों के रूप में नहीं भेजने को कहा गया है।

पैरा गेम्स में टूर के दौरान खिलाड़ियों को ‌फिपीजियो‌थेरेपिस्ट, मालिशवाले, डॉक्टर और क्वालिफाइड लोगों की जरूरत होती है।

बैंगलुरू के एक खिलाड़ी का गुआंगझाउ में 2010 में हुए पैरा एशियन गेम्स में ऐसा ही अनुभ्‍ाव रहा था। उस खिलाड़ी का कहना है कि उसे बहुत गुस्सा आया जब उसके सहायता के लिए गया व्यक्ति अधिकारियों का रिश्तेदार निकला और वो पूरे समय उनके साथ टूर का आनंद लेने में व्यस्त रहा। खेल मंत्री ने ही उन्हें भेजा था।

कहा जा रहा है कि पैरा एशियन गेम्स के दौरान तैराकी, टीटी, बैडमिंटन, तीरंदाजी, व्हीलचेयर टेनिस और अन्य खेल होंगे। आरोप है कि इसके बावजूद भी पीसीआई ने अभी तक कोई स्पेशल ट्रेनिंग कैंप का आयोजन नहीं किया है।
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