फिरोजपुर झिरका स्थित अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित पांडव कालीन ऐतिहासिक भव्य शिव मंदिर आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां पर कुछ समय व्यतीत किया था।
उन्होंने पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना की। तभी से यह जगह तपोभूमि के रूप में विख्यात हो गई। मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन होता है। इसमें हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के शिवभक्त आते हैं।
मान्यता है कि पवित्र गुफा में विराजमान शिव लिंग के दर्शन मात्र से ही जन्म जन्मांतर के दुखों और पापों का निवारण हो जाता है। मंदिर के विषय में यह बात प्रचलित है कि वर्ष 1,846 में क्षेत्र के तत्कालीन तहसीलदार जीवन लाल शर्मा को अरावली की पर्वत शृंखलाओं में शिवलिंग होने का सपना दिखा।
इसी आधार पर शिवलिंग को खोज निकाला गया। धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ती गई और भक्तों का तांता लगने लगा।
फिरोजपुर झिरका से पांच किलोमीटर दूर तिजारा मार्ग पर यह शिव मंदिर है।
शिवरात्रि पर मंदिर में लगने वाले मेले में भक्त नीलकंठ, गोमुख व हरिद्वार से कांवड़ लाकर पवित्र शिव लिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में नवविवाहिताएं पुत्ररत्न की प्राप्ति के लिए यहां पर आती हैं। प्राचीन समय से यहां पर कदंब का एक वृक्ष है। मनोकामना पूरी होने पर यहां भक्तजन मंदिर परिसर में भंडारा करते हैं।