आईसीएमआर के अनुसार, 823 लैब में जांच चल रही है। जिनमें से 520 में ही आरटी पीसीआर की जांच हो रही है। 240 मिनट और बाकी 63 में जीबी नेट से जांच हो रही है। यह दोनों मशीनें टीबी की जांच में भी जरूरी है। इसलिए कोरोना जांच को लेकर अन्य विकल्प भी बेहद जरूरी हैं।
भारत की आबादी बहुत है इसलिए जांच पर फोकस
अन्य देशों की तुलना में भारत की आबादी बहुत है। एक फीसदी लोगों की जांच भी नहीं हुई है। बीते मंगलवार तक 50 लाख सैंपल की जांच हो पाई। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा आसान और सरल तरीके खोजने की आवश्यकता है।
ऐसे मिला नया विकल्प
कोरोना जांच के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटीआर- क्यूपीसीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है इसमें आर्य के डीएनए में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन को जोड़ते हुए वायरस का पता लगाते हैं। यह जांच समय ज्यादा लेती है और महंगी भी है। इसलिए इसका विकल्प खोजने पर रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन स्टेट पीसीआर एंड प्वाइंट (आरटी-एनपीसीआर) तकनीक का पता चला जो कि गुणवत्ता के लिहाज से भी ज्यादा बेहतर है। दोनों की तुलना करने पर यह पाया गया है कि आरटी पीसीआर में संक्रमण की पहचान क्षमता 50 फीसदी कम हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार नए अध्ययन के परिणामों को आईसीएमआर के साथ साझा किया जाएगा।