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सामान्य पीसीआर मशीनें भी कर सकेंगी कोरोना की जांच, खर्च 500 से भी कम

Thu, 11 Jun 2020 01:21 PM IST
पूजा त्रिपाठी परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, दिल्ली
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कोरोना वायरस की जांच कराता शख्स(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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भारत में भी कोरोना वायरस की जांच की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब रोजाना डेढ़ लाख सैंपल की जांच की जा रही है। ऐसे में राहत यह है कि देश में सामान्य पीसीआर मशीनें भी कोविड-19 की जांच कर सकेंगी। खर्चा भी 500 से कम ही आएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि हर जिले या मेडिकल कॉलेज में वायरस की जांच की जा सकेगी। अभी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस प्रयोगशाला में कोरोना की जांच हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से एक साथ 24 सैंपल की जांच करने में मदद मिल सकती है।

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जानकारी के अनुसार, सीएसआईआर के हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी सीसीएमबी और गाजियाबाद स्थित एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च ने मिलकर यह अध्ययन किया है। हैदराबाद के ही अस्पतालों से मरीजों के सैंपल एकत्रित करने के बाद यह अध्ययन किया गया था। एनआईबी और लैब गन किट का इस्तेमाल करते हुए दोनों तकनीकों से जांच की गई। जिसके बाद यह परिणाम सामने आए हैं।

सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा का कहना है कि आरटी पीसीआर जांच सामान्य पीसीआर मशीन के जरिए भी संभव है। यह मशीन कोरोना महामारी से पहले ही भारत की कई लैब और मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हैं। बीएसएल दो स्तर की लैब में यह जांच हो सकती है। जबकि आरटी पीसीआर के लिए बीएसएल तीन स्तर की लैब होनी चाहिए। इसलिए यह जांच महज 500 रुपए से भी कम में संभव है।

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अन्य तरीकों से जांच पर जोर

आईसीएमआर के अनुसार, 823 लैब में जांच चल रही है। जिनमें से 520 में ही आरटी पीसीआर की जांच हो रही है। 240 मिनट और बाकी 63 में जीबी नेट से जांच हो रही है। यह दोनों मशीनें टीबी की जांच में भी जरूरी है। इसलिए कोरोना जांच को लेकर अन्य विकल्प भी बेहद जरूरी हैं।

भारत की आबादी बहुत है इसलिए जांच पर फोकस
अन्य देशों की तुलना में भारत की आबादी बहुत है। एक फीसदी लोगों की जांच भी नहीं हुई है। बीते मंगलवार तक 50 लाख सैंपल की जांच हो पाई। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा आसान और सरल तरीके खोजने की आवश्यकता है।

ऐसे मिला नया विकल्प
कोरोना जांच के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटीआर- क्यूपीसीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है इसमें आर्य के डीएनए में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन को जोड़ते हुए वायरस का पता लगाते हैं। यह जांच समय ज्यादा लेती है और महंगी भी है। इसलिए इसका विकल्प खोजने पर रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन स्टेट पीसीआर एंड प्वाइंट (आरटी-एनपीसीआर) तकनीक का पता चला जो कि गुणवत्ता के लिहाज से भी ज्यादा बेहतर है। दोनों की तुलना करने पर यह पाया गया है कि आरटी पीसीआर में संक्रमण की पहचान क्षमता 50 फीसदी कम हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार नए अध्ययन के परिणामों को आईसीएमआर के साथ साझा किया जाएगा।
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