निजी लैब पॉजिटिव रिपोर्ट का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग को थमा देती हैं। निगेटिव रिपोर्ट नहीं देती। इस कारण कुल सैंपलिंग का सही आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाता है। विभागीय अफसरों से लैबों पर भी नकेल कसी गई है। सूत्रों ने बताया कि जिले में जांच से जुड़ी करीब 17 निजी लैबों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सरकारी लैबों से सहयोग मिले तो बात बने
स्वास्थ्य विभाग ने जांच बढ़ाने की कोशिश की है। स्वास्थ्य विभाग की खुद की कोई लैब नहीं है। ऐसे में कोरोना मामलों की जांच पर निर्भरता जिम्स, चाइल्ड पीजीआई, शारदा, एनआईबी पर ही है। पिछले दिनों से सरकारी लैबों द्वारा भी पूरी रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराने की बात सामने आई थी। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
कोरोना पर नियंत्रण के लिए सैंपलिंग की दर बढ़ाई जा रही है। इसे अधिक बढ़ाने पर भी विचार किया गया है। इससे जिले में कोरोना तेजी से पकड़ में आएगा।- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ