अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एंड्रूयज गंज में स्थित इंदिरा कैंप में तोड़फोड़ से प्रभावित लोगों को अस्थायी आवास देने का आदेश दिया है। दिल्ली सरकार, नगर निगम (एमसीडी), और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने 13 और 14 मई को कैंप में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया था। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता को याचिकाकर्ता ने बताया कि हाईकोर्ट ने 14 मई को संबंधित अधिकारियों को निवासियों को बेदखल करने या उक्त आवासीय इकाइयों में किसी भी तरह की तोड़फोड़ करने से रोकने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश की जानकारी देने के लिए वहां मौजूद होने के बावजूद, एमसीडी के अधिकारियों ने आदेश की अवहेलना करते हुए तोड़फोड़ अभियान जारी रखा।
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता के हलफनामे में बताए गए तथ्य, यदि सही हैं तो एमसीडी के अधिकारियों के भयावह, असंवेदनशील और ढीठ आचरण को दर्शाते हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस तरह का आचरण (यदि सत्य पाया गया) संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जानबूझकर अवहेलना के लिए उचित कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है। इस पहलू को अगली सुनवाई की तारीख पर निपटाया जाएगा।
पहले प्रभावितों को दी जाए मदद
अदालत ने कहा कि उसका प्राथमिक ध्यान याचिकाकर्ताओं की दुर्दशा को दूर करने पर है, जो एमसीडी द्वारा उनके आवासीय मकानों को तोड़े जाने के कारण बेघर हो गए हैं। न्यायमूर्ति ने यह भी उल्लेख किया कि यह तोड़फोड़ इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि संबंधित झुग्गी समूह डीयूएसआईबी द्वारा प्रकाशित 675 झुग्गी समूहों की आधिकारिक सूची में अधिसूचित था। कोर्ट ने अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में शौचालय, बिजली और पानी की आपूर्ति सहित उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डीयूएसआईबी को निर्देश दिया कि संबंधित बस्ती के पुनर्वास के लिए आवश्यक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का प्रयास करे।
अगली कार्रवाई में उपस्थित हों एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त
न्यायमूर्ति ने एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त को अगली सुनवाई, यानी 24 नवंबर को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि उपरोक्त निर्देशों का पालन न करने को संबंधित अधिकारियों की ओर से गंभीर और जानबूझकर अवहेलना माना जाएगा।