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Delhi NCR News: स्थानांतरण के बाद सुरक्षित रखे गए निर्णयों को समय पर सुनाने के आदेश

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-उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्तराधिकारी न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में पुनर्विचार करने की अनुमति नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने राजधानी के निचली अदालतों के न्यायाधीशों को निर्देश दिया है। इसके तहत अदालत ने कहा कि वे अपने स्थानांतरण से पहले सुरक्षित रखे गए निर्णयों या आदेशों को नई नियुक्ति के दो से तीन सप्ताह के भीतर सुनाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तराधिकारी न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में पुनर्विचार करने की अनुमति नहीं है। न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा कि एक बार जब कोई मामला निर्णय के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है तो उसे सुनाने की जिम्मेदारी उस न्यायाधीश की होती है जिसने उसे सुना था, भले ही उनका स्थानांतरण हो गया हो।

अदालत ने कहा कि इस प्रथा से कोई भी विचलन अनावश्यक देरी, भ्रम और न्यायिक विश्वसनीयता के ह्रास का कारण बनता है। न्यायालय ने कहा कि उत्तराधिकारी न्यायालय को मामले को पुनर्विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं करना चाहिए। इसे जिला न्यायाधीश के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि उसे उस पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके जिसने निर्णय सुरक्षित रखा था। दिल्ली की सभी जिला अदालतों में इस प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन अनिवार्य किया। यह निर्देश एक मामले में दोषी ठहराए गए बीडी शर्मा की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए दिया गया।
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शर्मा ने दावा किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया, लेकिन अदालत ने कहा कि उन्हें बहस करने के 20 मौके दिए गए थे, जो अक्सर वकील बदलने और दस्तावेजों के गुम होने के कारण टाल दिए गए। मुकदमे के दौरान एक चूक उजागर हुई। मूल न्यायाधीश की तरफ से फैसला सुरक्षित रखने के बाद उनके स्थानांतरण के कारण उत्तराधिकारी न्यायाधीश को मामले को नए सिरे से बहस के लिए सूचीबद्ध करना पड़ा, जो स्थापित न्यायिक मानदंडों के विपरीत था।
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