- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, कहा कि ऑनलाइन अपलोड किए गए वीडियो और तस्वीरों में उन्हें अश्लील और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिखाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पोर्न वेबसाइटों को एक इन्फ्लुएंसर की डीपफेक और एआई-जनरेटेड अश्लील तस्वीरें और वीडियो हटाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने एक अंतरिम आदेश में कहा कि अपलोड की गई सामग्री पूरी तरह से भयावह, निंदनीय, मानहानिकारक है। वादी के मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन अपलोड किए गए वीडियो और तस्वीरों में उन्हें अश्लील और दुर्भावनापूर्ण तरीके से दिखाया गया है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ऐसी सामग्री पोस्ट करना न केवल उनकी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर नागरिक अपकृत्य भी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया तर्कों से सहमति जताते हुए निषेधाज्ञा पारित कर दी। न्यायमूर्ति कौरव ने मेटा (फेसबुक) और एक्स कॉर्प (ट्विटर) को उन सोशल मीडिया हैंडल्स का पूरा विवरण देने का आदेश दिया, जिन्होंने अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी। इसके अलावा पीठ ने अदालती कार्यवाही में वादी के विवरण को छिपाने का भी आदेश दिया।