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Delhi NCR News: फर्जी रिसर्च पब्लिकेशन मामले में डीयू के दो एसोसिएट प्रोफेसरों समेत तीन पर एफआईआर के आदेश

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-शालीमार बाग थाना प्रभारी को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर 30 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट ने फर्जी रिसर्च पब्लिकेशन और धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से जुड़े दो एसोसिएट प्रोफेसरों समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने पुलिस की उस रिपोर्ट से असहमति जताई, जिसमें मामले को सिविल विवाद बताते हुए एफआईआर दर्ज करने से इन्कार किया गया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट गौरव कटारिया ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला बनता है। अदालत ने शालीमार बाग थाना प्रभारी को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर 30 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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अदालत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कथित फर्जी रिसर्च प्रमाणपत्रों की फोरेंसिक जांच, संबंधित विश्वविद्यालयों और जर्नल प्रकाशकों से सत्यापन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय लेन-देन की जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कहीं अन्य नौकरी के अभ्यर्थी भी इसी तरह के कथित गिरोह का शिकार तो नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं है। पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कानून के तहत आगे की कार्रवाई करने को कहा गया है।
रिसर्च पेपर प्रकाशित कराने के नाम पर एक लाख रुपये नकद लिए
मामला भारती कॉलेज की पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर अंकिता किल्सेन की शिकायत पर सामने आया। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2021 में उनकी मुलाकात संजीव कुमार से कराई गई, जिसने खुद को एम्स का सीनियर मेडिकल ऑफिसर बताया। इसके बाद उसने उनकी मुलाकात दयाल सिंह कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद कुमार और भारती कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर ल्यूक खन्ना से कराई। आरोप है कि दोनों प्रोफेसरों ने प्रतिष्ठित जर्नल में रिसर्च पेपर प्रकाशित कराने के नाम पर एक लाख रुपये नकद लिए और उनके मूल शोध पत्र अपने पास रख लिए।
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रिसर्च पब्लिकेशन कथित रूप से फर्जी
शिकायत के मुताबिक, बाद में उन्हें तीन प्रकाशित रिसर्च पेपर और उनके प्रमाणपत्र दिए गए, जिनके आधार पर उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया। नवंबर 2023 में उनकी भारती कॉलेज में नियुक्ति हो गई। हालांकि अगस्त 2024 में आरटीआई के जरिए कॉलेज को सूचना मिली कि उनके द्वारा जमा किए गए रिसर्च पब्लिकेशन कथित रूप से फर्जी हैं। जांच के बाद कॉलेज ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया और अक्तूबर 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
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