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सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूलों की भर्ती प्रक्रिया में डीओई दखल नहीं दे सकता : दिल्ली हाईकोर्ट

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कोर्ट ने कहा- विभाग केवल योग्यता और अनुभव के मानक तय कर सकता है, भर्ती रोकने का अधिकार नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शिक्षा निदेशालय (डीओई) सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि डीओई की भूमिका केवल शिक्षकों और कर्मचारियों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तथा अनुभव के मानक तय करने तक सीमित है। भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने या अतिरिक्त शर्तें लागू करने का अधिकार विभाग के पास नहीं है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की एकल पीठ ने यह फैसला 1922 में स्थापित एक ईसाई अल्पसंख्यक स्कूल की याचिका पर सुनाया। स्कूल ने डीओई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी भर्ती प्रक्रिया रोकने और औचक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) कराने का निर्देश दिया गया था।
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अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थान का प्रबंधन करने और स्टाफ की नियुक्ति करने का सांविधानिक अधिकार प्राप्त है। यदि नियुक्त कर्मचारी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें पूरी करते हैं, तो राज्य या उसका कोई विभाग भर्ती प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नए नियुक्त कर्मचारियों की योग्यता या अनुभव पर डीओई ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया रोकने का आदेश न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने डीओई का आदेश रद्द कर दिया।
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कोर्ट ने 19 कर्मचारियों के वेतन के लिए चार सप्ताह के भीतर ग्रांट-इन-एड जारी करने का भी निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश डिवीजन बेंच में लंबित संबंधित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का भी उल्लेख किया और दोहराया कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार है, बशर्ते वे निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव संबंधी मानकों का पालन करें।
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