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Delhi NCR News: मानहानि मामले में विवादित लेख हटाने के आदेश

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-कोर्ट ने कहा कि जांच या विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को सावधानी बरतनी चाहिए
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उद्यमी और निवेशक अंकीति बोस को मानहानि के एक मामले में द्वारका कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए विवादित लेख को हटाने और उससे मिलती-जुलती सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हरजोत सिंह भल्ला ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक प्रतिवादी न तो विवादित लेख प्रकाशित करेंगे और न ही उसे साझा, रीपोस्ट या प्रसारित करेंगे। अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि लेख में जिन आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है, उनमें अंकीति बोस आरोपी नहीं है। अदालत के अनुसार, बोस स्वयं अपने पूर्व सहयोगी और जिलिंगो के सह-संस्थापक के खिलाफ दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता हैं।

कोर्ट ने कहा कि जांच या विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को सावधानी बरतनी चाहिए। किसी न्यायिक निर्णय से पहले किसी व्यक्ति को दोषी बताना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। अदालत ने माना कि बोस ने प्रथम दृष्टया अपना पक्ष साबित किया है और विवादित सामग्री के लगातार प्रसार से उन्हें अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने लेख हटाने और बोस के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य आपराधिक आरोपों से जुड़ी सामग्री प्रकाशित करने पर रोक लगा दी।
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आदेश में कहा गया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो अंकीति बोस संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मध्यस्थों से सीधे संपर्क कर सामग्री हटाने या डी-इंडेक्स कराने की कार्रवाई कर सकती हैं। कोर्ट ने उल्लेख किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही बोस के खिलाफ प्रतिकूल आरोपों वाले एक अन्य प्रकाशन पर रोक लगा चुका है।
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