इंजीनियरिंग, मेडिकल की पढ़ाई के बाद अब शैक्षणिक सत्र 2024 से स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में भी रीजनल भाषाओं में पढ़ाई का विकल्प मिलेगा। विश्वविद्यालयों में बीए, बीकॉम, बीएससी, लॉ समेत अन्य कोर्स की किताबों के अनुवाद को लेकर काम शुरू हो गया है।
पहले चरण में डेढ़ से दो साल में 12 भारतीय भाषाओं में किताबों का अनुवाद किया जाएगा। दूसरे चरण यानी आगामी 10 सालों में उच्च शिक्षा में सभी प्रोग्राम की किताबों को सभी 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने का लक्षय रखा गया है। यूजी और पीजी प्रोग्राम की किताबों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग के विशेषज्ञ मदद करेंगे।
शिक्षा मंत्रालय की उच्चाधिकार समिति और भारतीय भाषा समिति के चेयरमैन चमू कृष्ण शास्त्री ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020की सिफारिशों के तहत कॉलेजों औरविश्वविद्यालयों के छात्रों को भी भारतीय भाषाओं में पढ़ाई का मौका उपलब्ध करवाना है।
इसके लिए 200 विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा गया है, जिसमें डीयू, बीएचयू, इग्नू, सीयू बिहार, एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी तमिलनाडू, डॉ. अंबेडकर यूनिवर्सिटी अहमदाबाद, डॉ. हरि सिंह गौर केंद्रीय विवि सागर,बंगलूरू नॉर्थ यूनिवर्सिटी समेत अन्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। इंजीनियरिंग की जेईई मेन और मेडिकल दाखिले की नीट परीक्षा हिंदी, असमी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगू, मलयालम, कन्नड़, मराठी, ओड़िया, उूर्द, पंजाबी में आयोजित होती है।