बाल मजदूरी और अन्य कामों में लिप्त बच्चों को माता-पिता से मिलवाने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन स्माइल’ को बड़ा झटका लगा है।
आपरेशन स्माइल के तहत बरामद किए गए 23 बच्चे शहीद नगर स्थित आशादीप फाउंडेशन के शेल्टर होम से भाग गए हैं। ये बच्चे 11 से 27 अक्तूबर के बीच शेल्टर होम की खिड़की काटकर भागे।
फाउंडेशन का दावा है कि भागने वाले अधिकांश बच्चे नशे के आदी थे। सूचना के बावजूद अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बुधवार को खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया। अब अधिकारी शेल्टर होम संचालकों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
ऑपरेशन स्माइल के अंतर्गत आठ से 27 अक्तूबर के बीच आशा निकेतन में कुल 65 बच्चों को रखा गया था। इन बच्चों को दिल्ली, गाजियाबाद और अन्य स्थानों पर बाल मजदूरी आदि करते पाया गया था।
आठ अक्तूबर के बाद से आशा निकेतन से 23 बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द किया गया। मगर इस दौरान कुल 23 बच्चे शेल्टर होम से भाग निकले। शेल्टर होम संचालकों का कहना है कि भागने वालों में कुछ किशोर भी हैं।
यहां नशा नहीं मिलने पर वह भाग निकले। बच्चे मुजफ्फरनगर, बरेली, कानपुर और बिहार के हैं। डायरेक्टर एचके चेट्टी ने बताया कि शेल्टर होम में बच्चों को बंद करके नहीं रखा जा सकता।
खेलने-कूदने के दौरान उन्होंने खिड़की की ग्रिल काटी और दीवार फांदकर भाग निकले। साहिबाबाद थाने में भागे बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई है। शेल्टर होम में अब आपरेशन स्माइल के 18 बच्चों समेत कुल 40 बच्चे हैं।
23 बच्चों को उनके माता-पिता के पास भेज दिया गया है, जबकि एक बच्चे को लाल बहादुर शास्त्री शेल्टर होम में भेजा गया है।
11 अक्तूबर से शुरू हुआ भागने का सिलसिला
11 अक्तूबर को रेहान और अयूब नामक दो बच्चे शेल्टर होम की ग्रिल काटकर भाग निकले। इसकी सूचना डायरेक्टर ने पुलिस को दी। इसके बाद 12 को एक, 13 को चार, 14 तारीख को तीन, 15 को तीन, 18 को तीन, 19 को एक, 25 को एक, 26 को पांच और 27 अक्तूबर को एक बच्चा शेल्टर होम से भाग निकला।