अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा कि चलते यातायात में चेक किए बिना कार का दरवाजा खोलना गंभीर लापरवाही है। ऐसे में कार चालक को हुई दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मोटरसाइकिल चालक को आगे वाली गाड़ी के बहुत करीब चलने का दोष नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने मामले की सुनवाई कर रही थी।
20 अगस्त 2024 को बुराड़ी इलाके में एक मोटरसाइकिल सवार युवक ने आगे खड़ी कार का अचानक दरवाजा खुलने पर टकरा गया। कार चालक ने बिना किसी चेतावनी या पीछे देखे दरवाजा खोल दिया था। दुर्घटना में 21 वर्षीय मोटरसाइकिल चालक को गंभीर चोटें आईं। दोनों निचले अंगों में फ्रैक्चर और सिर में चोट लगी। युवक को लगभग एक महीने अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने चोटों को 90 प्रतिशत स्थायी विकलांगता माना और कार चालक की पूर्ण लापरवाही मानते हुए इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया।
इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील की और दावा किया कि मोटरसाइकिल चालक भी आंशिक रूप से दोषी था क्योंकि वह आगे वाली कार के बहुत करीब चल रहा था। अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दयाल ने कहा कि चलते ट्रैफिक चेक किए बिना कार का दरवाजा खोलना निश्चित रूप से गंभीर लापरवाही का कार्य है, जिसके लिए दोषी वाहन के ड्राइवर पर दायित्व सही ढंग से लगाया गया है। अदालत ने कहा कि सड़क नियमों में वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने का प्रावधान दरवाजा लापरवाही से खोलने वाले चालक को दोषमुक्त नहीं करता। ट्रिब्यूनल ने युवक को 3.5 लाख रुपये अटेंडेंट चार्जेस (परिचारक खर्च) के रूप में दिए थे, जिसे भी हाईकोर्ट ने उचित माना। अदालत ने कहा कि ट्रॉमैटिक पैराप्लेजिया (दोनों निचले अंगों का लकवा) से पीड़ित 21 वर्षीय युवक को आजीवन किसी की मदद की जरूरत पड़ेगी।