एम्स में लगी भीषण आग से मरीज परेशान
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दिल्ली एम्स में भीषण आग और दमघोंटू धुएं से बचाते हुए करीब 700 से ज्यादा मरीजों को आरपी सेंटर शिफ्ट किया गया, जहां उन्हें अलग-अलग ब्लॉक में रखा गया। हर विभाग के डॉक्टर, रेजीडेंट, मेडिकल स्टूडेंट, नर्स आदि को यहां तैनात किया गया। इसी बीच आरपी सेंटर में जहां आंखों की ओपीडी रहती है, वहां मरीजों का आश्रय गृह बनाया गया। जहां आंखों से जुड़े गंभीर मामले आते हैं, वहां प्रसूति कक्ष तैयार किया और आपात स्थिति में प्रसव कराए गए।
ठीक इसी तरह आरपी सेंटर के डे-केयर में मासूम मरीजों को रखा गया। ये बच्चे सर्जरी विभाग में भर्ती हुए थे। चारों ओर अफरातफरी के बीच डॉक्टरों ने समय रहते मरीजों को उचित स्थान पर ले जाने में सफलता हासिल की। रविवार को इन सभी मरीजों को वापस से उनके वार्ड में शिफ्ट कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, बीती रात आरपी सेंटर में कम मरीज थे, इसलिए वहां मरीजों को आश्रय देना आसान था। दूसरी ओर कई डॉक्टर छुट्टी पर थे, लेकिन घटना के बाद वह वापस काम पर लौट गए।
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सेवा में जुटे रहे डॉक्टर और नर्स
रविवार को आंखों में आंसुओं के बीच आग का वो मंजर हर मरीज की जुबान पर था। एबी-1 वार्ड में भर्ती मरीजों से जब व्यवस्थाओं को लेकर पूछा गया तो उन्होंने डॉक्टरों को अपना भगवान बताया। फिरोजाबाद से आए महेश कुमार बताते हैं कि वे पैर के ऑपरेशन के लिए यहां भर्ती हुए थे। रात में आग लगने के बाद उन्हें आरपी सेंटर में शिफ्ट कर दिया। डॉक्टरों की मेहनत ने सबको बचा लिया। रातभर ना सिर्फ मरीज बल्कि, उनके साथ मौजूद तीमारदारों को डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी अपने घरों और हॉस्टल से खाना बनाकर खिलाते रहे। कई बार छोटे बच्चों को दूध गरम करके भी लाकर दिया।