केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ( सीजेडए) ने हाईकोर्ट को बताया है कि गुजरात का ‘ग्रेट गोल्डन सर्कस’ ही देश का एकमात्र ऐसा सर्कस है, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से मान्यता प्राप्त है। हाथियों के रखरखाव और प्रदर्शन के संबंध में कानूनों के प्रावधानों के कथित उल्लंघन को लेकर भी सर्कस को नोटिस जारी करके कहा गया है कि क्यों न उसकी मान्यता रद्द कर दी जाए।
प्राधिकरण ने न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में यह प्रतिवेदन दिया है। दरअसल, वन्यजीवों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पेटा) और भारतीय पशु संरक्षण संगठन के परिसंघ (एफआईएपीओ) ने जनहित याचिका दायर की है।
इसमें संस्था की ओर से पेश वकील अमन और स्वाति की ओर से दावा किया गया है कि कोरोना महामारी के कारण सर्कस में रह रहे वन्यजीवों को खाना खिलाने में कठिनाई हो रही है। इस वजह से वन्यजीव भुखमरी के हालात पर पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही मांग की गई कि केंद्र को इस संबंध में प्रदर्शन करने वाले वन्यजीवों के संशोधन नियम 2018 के संबंध में सूचित किया जाए, जो वन्यजीवों के प्रदर्शन और उनके प्रशिक्षण पर रोक लगाने का काम करता है।
आईपीएफओ 100 संस्थानों का एक समूह है, जो पिछले कई सालों से वन्यजीवों के अधिकारों के लिए काम कर रहा है। संस्था ने अपनी अपील में संवैधानिक वैधता के सेक्शन-21 से 27 तक जीव संरक्षण को लेकर चुनौती दायर की है।