नोएडा सिटी सेंटर से सेक्टर-62 तक करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबे मेट्रो प्रोजेक्ट का काम शुरू होने में बस केंद्र की एक ‘हां’ की दरकार है।
प्रोजेक्ट को दिल्ली सरकार ने भी मंजूरी दे दी है और अब केवल शहरी विकास मंत्रालय की मंजूरी मिलनी बाकी है। जिसके बाद मेट्रो का काम रफ्तार पकड़ लेगा। डीएमआरसी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे चुकी है।
6.67 किलोमीटर लंबे रूट के प्रस्ताव पर दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग ने मुहर लगा दी है। इस परियोजना के निर्माण का 20 प्रतिशत खर्च केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को उठाना है इसलिए केंद्र की अंतिम मंजूरी जरूरी है।
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इसके बाद प्राधिकरण और डीएमआरसी के बीच एमओयू पर साइन हो जाएंगे और डीएमआरसी काम शुरू कर देगी। इस रूट के निर्माण में 1356 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, कागजी प्रक्रिया के चलते इसमें कुछ वक्त और लग सकता है।
ये होगा फायदा
इस रूट पर मेट्रो चलने से फेज तीन स्थित औद्योगिक सेक्टरों 58, 59, 60, 63, 64, 65 58 की इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों को सुविधा मिल जाएगी। दूसरे, सेक्टर 52, 61, 71, 73, मामूरा, 62, नवादा आदि आवासीय इलाके भी मेट्रो से जुड़ जाएंगे। सिटी सेंटर तक यहां से अभी ऑटो, टैंपो या रिक्शा ही आवागमन का साधन हैं।
नोएडा-ग्रेनो मेट्रो पर हुई बैठक
सिटी सेंटर से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो रूट पर बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण की बैठक हुई। मंत्रालय ने कुछ सवालों का जवाब मांगा है। इसके बाद वहां से भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है। 29.70 किलोमीटर इस लंबे रूट का डीपीआर डीएमआरसी ने तैयार किया है। करीब 5064 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश शासन से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
बॉटेनिकल गार्डन के एमओयू को मंजूरी जल्द
बॉटेनिकल गार्डन से कालिंदीकुंज मेट्रो रूट के एमओयू को शासन से मंजूरी के लिए इस माह के अंतिम सप्ताह में (26 अप्रैल संभावित) बैठक होगी। मुख्य सचिव के साथ होने वाली इस बैठक में चेयरमैन रमा रमण व आईडीसी शामिल होंगे। शासन से एमओयू को हरी झंडी मिलने के आसार हैं। 3.96 किलोमीटर इस लंबे रूट को बनाने में 845 करोड़ रुपये खर्च होंगे। काम पूरा करने का लक्ष्य 2016 तय किया गया है।