एनसीआरबी ने जारी की जेल सांख्यिकी 2024
दिल्ली की जेलों में महज 12 फीसदी कैदी ही सजायाफ्ता, बाकी 88 फीसदी विचाराधीन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से देशभर के जेलों की स्थिति पर जारी रिपोर्ट में भी दिल्ली की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद होने की बात कही है। क्षमता के मुताबिक जहां राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश के लिए 112.7 फीसदी कैदी हैं, वहीं दिल्ली में यह दर 194.6 फीसदी है। यह संख्या सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक है।
दिल्ली के सभी 16 जेलों में कैदियों की रखने की क्षमता 10026 है। वहीं एनसीआरबी की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा कि इन जेलों में 19512 कैदी बंद हैं। जिसमें विचाराधीन कैदियों की संख्या सबसे अधिक है। कैदियों की कुल संख्या का करीब 88 फीसदी विचाराधीन कैदी जेल में बंद हैं। दिल्ली के जेलों में बंद 11.4 फीसदी कैदी ही सजायाफ्ता हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की जेलों में बंद 4647 विचाराधीन कैदी अनपढ़ हैं, जबकि अन्य पढ़े लिखे हैं। इसमें दसवीं से लेकर पीजी की डिग्री हासिल करने वाले तक शामिल हैं। 6949 कैदी ऐसे हैं जो पढ़े लिखे हैं, लेकिन इनके पास 10वीं की डिग्री नहीं है। 3717 कैदी ऐसे हैं, जिन्होंने 10 वीं कक्षा से अधिक लेकिन बीए से कम तक की पढ़ाई की है। 1470 कैदी के पास स्नातक की डिग्री है। 160 डिप्लोमा लिए हैं। वहीं 225 के पास पीजी की डिग्री है। जेल में बंद आधा से अधिक फीसदी कैदी की उम्र 18 से 30 साल के बीच है। इनकी कुल संख्या करीब 58 फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के जेलों में बंद ज्यादातर कैदी हत्या व महिलाओं से अपराध में शामिल हैं। जेल में बंद चार सौ कैदी दुष्कर्म के मामले में सजा भुगत रहे हैं। जबकि ऐसे विचाराधीन कैदियों की संख्या 1344 है। 792 कैदियों को हत्या के मामले में सजा मिल चुकी है। वहीं 2987 कैदी हत्या के आरोप का सामना कर रहे हैं। इसी तरह हत्या का प्रयास का आरोप 1258 कैदियों पर है।