आखिरकार हाउस टैक्स के मामले में मेयर की ही चली। 25 फीसदी के बजाए शहरवासियों पर 10 फीसदी ही हाउस टैक्स बढ़ाया गया। अब एक अप्रैल से शहर के भवन मालिकों को बढ़ा हुआ हाउस टैक्स देना होगा।
बुधवार को हुई निगम की बजट बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग गई। हालांकि नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त कालोनियों को कैटेगरी में बांटकर टैक्स 2.5 गुना तक रिवाइज का प्रस्ताव लागू करने वाले थे।
लेकिन नए नगर आयुक्त और महापौर ने दोबारा टैक्स की दरें रिवाइज करने से इनकार कर दिया। हाउस टैक्स बढ़ने से महानगर के 2.70 लाख भवन मालिकों की जेब पर असर पड़ेगा।
‘अमर उजाला’ ने 9 मार्च को ही इस समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि हाउस टैक्स केवल 10 फीसदी ही बढ़ाया जाएगा। बुधवार को निगम की बजट बैठक में ठीक वैसा ही निर्णय हुआ।
सुबह 11 बजे निगम सभागार में महापौर तेलूराम कांबोज की अध्यक्षता और नगर आयुक्त अब्दुल समद की मौजूदगी में शुरू हुई बैठक में लेखाधिकारी एके मिश्रा ने बजट पेश किया।
उन्होंने बताया कि बजट में हाउस टैक्स वसूली का लक्ष्य 10 फीसदी बढ़ाकर ही प्रस्तुत किया गया। निगम सदन से पास प्रस्ताव के आधार पर एक अप्रैल से सिर्फ 10 फीसदी ही टैक्स बढ़ाया जाएगा।
निगम यह फैसला नवंबर 2014 में ले चुका था। महानगर में करीब 13 साल बाद नगर निगम ने हाउस टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया।
टैक्स की दरों में इजाफा हो जाने के बाद 2000 रुपये सालाना टैक्स जमा करने वाले मकान मालिक को 2200 रुपये चुकाने पड़ेंगे।
बता दें कि पूर्व नगर आयुक्त वर्तमान हाउस टैक्स की दरों में ढाई गुना तक इजाफा कर 3 रुपये प्रति वर्ग फीट करना चाहते थे, लेकिन महापौर और पार्षदों ने इसका विरोध कर दिया था।
नियमित नहीं होंगी कालोनियां
अब शहर की करीब 250 अनियमित कालोनियों के लोगों को भी टैक्स देना पड़ेगा। सुनियोजित विकास के लिए निगम इन्हें टैक्स के दायरे में लाएगा।
35 वार्डों की इन कालोनियों में टैक्स से छूटे भवनों को चिह्नित करने के लिए प्राइवेट एजेंसी हायर की जाएगी। एजेंसी सर्वे कर निगम को रिपोर्ट देगी।
नगर आयुक्त ने बताया कि हाउस टैक्स का निर्धारण कराने के लिए वार्ड वार सर्वे होगा। इन कालोनियों से टैक्स मिलने लगा तो निगम की आमदनी कई गुना बढ़ जाएगी और शहर में सुनियोजित विकास कराया जा सकेगा।
माना जा रहा है कि टैक्स से छूटे 35 वार्डों से निगम को सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये की इनकम हो सकती है।
मेट्रो स्टेशन का नाम ‘क्रांति स्थल’ रखने का प्रस्ताव
निगम ने मेट्रो के नए बस अड्डा स्थित स्टेशन का नाम 1857 में हिंडन तट पर हुई क्रांति पर आधारित ‘क्रांति स्थल’ रखने का प्रस्ताव पास किया है।
निगम इस प्रस्ताव को जीडीए को भेजेगा। कार्यकारिणी सदस्य बाबू सिंह आर्य ने इस प्रस्ताव को रखा। यह नाम आजादी की लड़ाई में गाजियाबाद की भूमिका की याद दिलाएगा।
सिटी फॉरेस्ट की स्टॉल को निगम करेगा सील
निगम पार्षद प्रवीन चौधरी ने कहा कि यहां किसी भी कामर्शियल एक्टिविटी की अनुमति निगम ने नहीं दी थी।
जीडीए ने निगम की सहमति के बिना सिटी फारेस्ट में कैंटीन व अन्य ठेके छोड़ दिए हैं। एक सप्ताह में एमओयू साइन न किया गया और इनकम में निगम को शामिल न किया गया तो स्टॉल को सील कर दिया जाएगा।
एफओबी की लागत की होगी जांच
पार्षदों ने बीओटी पर बनाए गए एफओबी (फुटओवर ब्रिज) की लागत ज्यादा दर्शाकर फर्म को ज्यादा दिन के लिए विज्ञापन की अनुमति देने का आरोप लगाया। उन्होंने नक्शों में प्रावधान होने के बावजूद कहीं भी एस्केलेटर न लगाए जाने का आरोप लगाया।
पार्षद अनिल चौधरी की मांग पर महापौर ने बीओटी मामलों की जांच के लिए कमेटी का गठन करने के निर्देश दिए हैं। उधर, निगम अधिकारियों ने बताया कि तीन महीने में सभी जगह एफओबी पर एस्केलेटर लगाए जाएंगे।
फिर 7.5 करोड़ का ‘पैचवर्क’
पैचवर्क के 5 करोड़ के बजट को 7.5 करोड़ किया गया है। निगम की क्यूआरटी (क्विक रिएक्शन टीम) मौके पर पहुंचेगी और सड़कों के गड्ढों को भरेगी।
हर जोन में एक रोड रोलर रहेगा। गड्ढे होते ही सड़क को रिपेयर किए जाने से उनकी लाइफ ज्यादा हो जाएगी।
खुद फ्लैट और कामर्शियल कांप्लेक्स बनाएगा निगम
नगर निगम ने जीडीए के साथ हाउसिंग स्कीम लाने से बुधवार को बजट बैठक में इनकार कर दिया है। निगम अपने दम पर बिल्डरों को साझेदार कर हाउसिंग स्कीम और कामर्शियल कांप्लेक्स बनाएगा।
बुधवार को कार्यकारिणी समिति की बजट बैठक में नगर आयुक्त अब्दुल समद के प्रस्ताव पर समिति के सभी 12 सदस्यों ने इस पर सहमति जताई।
नगर आयुक्त ने बताया कि इसके लिए विज्ञापन जारी कर प्राइवेट बिल्डर को आमंत्रित किया जाएगा। जो बिल्डर आमदनी का अधिकतम शेयर निगम को देगा, उसके साथ ही कांट्रेक्ट कर निगम सरकारी जमीनों पर हाउसिंग और कामर्शियल बिल्डिंग के प्रोजेक्ट बनाएगा।
उन्होंने बताया कि संपत्ति विभाग के अधिकारी प्राइम लोकेशन की जमीनों को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इसके बाद बोर्ड बैठक में इसका डिटेल प्रस्ताव तैयार कराकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जीडीए चाहे तो अन्य संस्थाओं की तरह प्रतिस्पर्धा में आ सकता है। उन्होंने कहा कि नए वित्तीय वर्ष में योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।