हत्या की साजिश रचने वाले चंद्रमोहन ने दादरी के आर्य समाज मंदिर में प्रीति नागर से शादी करने के लिए पेश किए गए दस्तावेजों में भी हेराफेरी की थी।
कागजों में हेराफेरी करने और दूसरी शादी करने के मामले में पुलिस मामले में 420 की धारा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। 26 सितंबर को पुलिस कई महत्वपूर्ण तथ्य भी न्यायालय में पेश करेगी।
आईटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन शर्मा कांड में हेराफेरी करने के कई पुख्ता सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। चंद्रमोहन ने मौत की झूठी घटना को अंजाम देने से छह माह पहले ही 28 नवंबर 2013 को दादरी के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। इसमें पुरोहित विकास ने कागजी कार्यवाही पूरी कराई थी। कासना पुलिस का कहना है कि 26 सितंबर को जमानत अर्जी पर सुनवाई है।
पुलिस के मुताबिक, आईडी के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस दिया गया था, जिसमें गुड़गांव का पता था। वहीं, प्रीति नागर ने दिल्ली के सेकेंडरी स्कूल की मार्कशीट लगाई थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 जुलाई 1990 है। शादी के लिए दोनों ने बिना नोटरी कराए शपथपत्र दाखिल किए। साथ ही चंद्रमोहन ने आईडी में कम उम्र दिखाई। उसको कम करने के लिए दस्तावेज से हेराफेरी की गई है।
गवाहों की नहीं लगी आईडी
शादी के लिए गवाह के रूप में नीलेश रंजन पुत्र रामप्रवेश निवासी आवास विकास कॉलोनी बरेली और देवेंद्र प्रताप निवासी रामनेर गौतमबुद्ध नगर के हस्ताक्षर हैं लेकिन उनकी आईडी प्रूफ नहीं लगे हैं। गवाहों की आईडी बाद में देने की बात कहते हुए शादी की रस्म पूरी कराई गई।