दिल्ली नगर निगम को एकीकृत हुए एक माह हो गया। इस दौरान एमसीडी में कई बदलाव हुए। 22 मई को दिल्ली के तीनों निगम एक हो गए थे। इस बीच प्रशासनिक स्तर पर कितने बदलाव हुए यह देखने वाली बात है। एमसीडी के कर्मचारियों की समस्याओं का कितना समाधान हुआ बताएगी रिपोर्ट।
एमसीडी ने सफाई व्यवस्था की अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर ढंग से पूरा करने का प्रयास किया है। साथ ही लैंडफिल साइट को 2024 तक पूरी तरह खत्म करने की योजना पर विशेष फोकस किया। इसके लिए विशेष अधिकारी अश्वनी कुमार और निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती ने लैंडफिल साइट का कई बार दौरा किया। नालों की सफाई का काम अच्छी तरह से हुआ। एमसीडी ने मानसून आने से पहले अपने अधिकार क्षेत्र के नालों की सफाई का अधिकतर काम पूरा किया। सड़कों को जाम मुक्त बनाने के लिए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई और स्कूलों में बेहतर व्यवस्था करने की दिशा में भी तेजी से कार्य हुआ। अपनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर करने की दिशा में काम करते हुए बाड़ा हिंदूराव अस्पताल में ई-संजीवनी ओपीडी खोली है। दिल्ली वासियों की परेशानियों के समाधान के लिए निगम मुख्यालय सहित सभी उपायुक्त कार्यालयों में सोमवार से शुक्रवार जनसुनवाई कार्यक्रम शुरू कराया है। इसके साथ-साथ विभागीय कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए भ्रष्टाचार शिकायत सेल का गठन किया है।
कामकाज की रिपोर्ट बताएगी ई-स्पैरो
कर्मचारियों के कामकाज की सालाना रिपोर्ट को बताने के लिए एमसीडी ने बुधवार को ई-स्पैरो (स्मार्ट परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकार्डिंग विंडो) की व्यवस्था शुरू की है। इसके बाद अब प्रत्येक कर्मचारियों के मोबाइल पर उसके काम काज की रिपोर्ट मौजूद रहेगी। यह एक एप्लीकेशन है, जो सभी कर्मचारियों के फोन में इंस्टाल रहेगा।
कर्मचारियों की परेशानियां बरकरार
एमसीडी के एक लाख से अधिक कर्मचारियों को उनका वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण इनकी परेशानियां ज्यों की त्यों हैं। पेंशन भोगियों को बकाया पेंशन नहीं मिली है। इस बीच एमसीडी ने सफाई कर्मचारियों को उनके बकाए का एक महीने का वेतन जरूर दिया है। इस महीने सभी कर्मचारियों को एक साथ एक महीने का वेतन और पेंशन भी दी गई है।
प्रशासनिक ढांचा अभी नहीं हुआ स्थिर
एक महीने बाद अभी भी एमसीडी का प्रशासनिक ढांचा सही तरीके से कार्य शुरू नहीं कर पाया है। तबादलों का दौर जारी है, मंगलवार को भी स्वास्थ्य विभाग के 15 अधिकारियों का तबादला किया गया है। कई अधिकारियों पर तबादले की तलवार अभी भी लटकी हुई है।