निजी मंदिर के संपत्ति विवाद का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक निजी मंदिर के संपत्ति विवाद में भगवान हनुमान को पक्षकार बनाने वाले व्यक्ति पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत पूजा करने का अधिकार किसी अवैध धार्मिक संरचना में निहित नहीं हो सकता है।
अपीलकर्ता अंकित मिश्रा ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के फैसले के बाद उनके और अन्य की ओर से दायर आपत्ति याचिका खारिज होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। अपने आदेश में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने कहा कि मिश्रा कोई प्रामाणिकता नहीं दिखा सके जो उन्हें भगवान हनुमान के अगले मित्र के रूप में मुकदमा करने का अधिकार देती। अदालत ने यह भी माना कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत, पूजा करने का कोई अधिकार किसी अन्य की निजी भूमि पर बने अवैध धार्मिक ढांचे में निहित नहीं हो सकता है और कहा कि ऐसी स्थिति में स्थापित देवता के पास कोई अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था कि भगवान एक दिन मेरे सामने एक वादी बनेंगे। शुक्र है कि यह प्रॉक्सी द्वारा दिव्यता का मामला प्रतीत होता है। न्यायमूर्ति शंकर ने कहा कि एक निजी मंदिर में सार्वजनिक पूजा, यहां तक कि मुफ्त पहुंच के साथ वास्तव में यह नहीं दर्शाता है कि मंदिर एक सार्वजनिक मंदिर है। उन्होंने कहा कि केवल इसलिए कि लोगों को एक निजी मंदिर में पूजा करने की अनुमति है, इसका मतलब यह नहीं है कि जिस भूमि पर एक निजी मंदिर का निर्माण किया गया है वह देवता में निहित है।