दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल के अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई है। आरोपियों ने शिकायत की थी कि उन्हें वे बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिनकी अनुमति जेल नियम देते हैं। अदालत ने कहा कि यदि चीजों में सुधार नहीं होता है तो न्यायाधीश जेल में स्थिति का निरीक्षण करने खुद जाएंगे।
अदालत ने दिल्ली जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह मामले के सभी 15 आरोपियों की शिकायतों को देखें और मंडोली व तिहाड़ जेलों में स्थिति का निरीक्षण करने का किसी को आदेश दें। इन आरोपियों को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत नामजद किया गया है।
उसने अधिकारियों से कहा कि वे 23 नवंबर को स्थिति के बारे में अदालत को अवगत कराएं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि यह खत्म होना चाहिए। महानिदेशक जेल को स्थिति का निरीक्षण करने, समस्याओं को देखने के लिए किसी को निरीक्षण करने का आदेश देने का निर्देश दिया जाता है। यदि चीजें नहीं सुधरती हैं तो मैं खुद निरीक्षण के लिए जाऊंगा और मेरे साथ वकील भी चल सकते हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई सुनवाई में 15 में से सात आरोपियों ने कहा कि उन्हें गरम कपड़े नहीं दिए गए हैं जबकि जेल नियमों के तहत इसकी अनुमति है, और जेल अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए उन्हें अदालत के आदेश की आवश्यकता है।
न्यायाधीश ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी समझ में नहीं आ रहा कि आरोपियों को इस तरह की मूलभूत चीजों के लिए हर बार अदालत से संपर्क क्यों करना पड़ता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों को जेल में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।