सोशल मीडिया पर बच्चों का टीकाकरण करने एवं गोली देकर उनको नपुसंक बनाने की साजिश का गलत संदेश भेजने का असर शनिवार को भी दिखाई दिया। सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर रही। कुछ जगह अध्यापकों के समझाने के बाद अभिभावक समझ गए लेकिन अधिकांश जगहों पर अभिभावक नहीं समझ रहे हैं।
बता दें कि व्हाट्स ऐप पर कुछ लोगों द्वारा गलत संदेश भेजने एवं इसका प्रचार तेजी से होने के बाद से ही सरकारी स्कूलों में अफरातफरी मची हुई थी। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों से घर ले आए। सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा।
शनिवार को अधिकांश स्कूलों में बच्चों की संख्या न के बराबर रही। एक स्कूल में 110 बच्चों में से केवल 20 ही बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आए। जबकि बघौला मिडिल स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 40 से 50 प्रतिशत प्रभावित हुई।
ये बच्चे भी जब आए हैं जबकि स्कूल के अध्यापक सईद-उर रहमान ने मस्जिद में एलान करवाने के साथ-साथ गांव में घर-घर जाकर बच्चों को लाने में मेहनत की है। इसी गांव के प्राइमरी स्कूल में 250 में से केवल 20 बच्चे ही उपस्थित थे।
स्कूल से भाग आया नहीं तो इंजेक्शन लग जाता
इस अफवाह का बच्चों पर इस कदर असर है कि छोटे-छोटे बच्चों को भी डर सता रहा है। सर्वोदय मिडिल स्कूल में चौथी कक्षा में शिक्षा ग्रहण करने वाले अरमान ने कहा अंकल स्कूल से भाग आया वरना मेरे भी इंजेक्शन लग जाता।
इंजेक्शन लगने के डर की वजह से ही शनिवार को वह स्कूल नहीं गया है। इन बच्चों को यह नहीं पता कि यह महज एक अफवाह है। लेकिन इस अफवाह ने छोटे-छोटे बच्चों के दिल और दिमाग पर भी इंजेक्शन एवं गोली का डर बना हुआ है।