आतंकी संगठन आईएसआईएस की कमर तोड़ने के लिए चलाए गए संयुक्त अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के यहां के दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के हाथ पांव फूले हुए हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को उस संस्थान के वैज्ञानिकों पर भी विश्वास नहीं है जहां ओलांद का दौरा होने वाला है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई) में 25 जनवरी को ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने का कार्यक्रम है।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश से इंटरसेप्ट हुई हिजबुल तहरीर नामक आतंकी संगठन की कॉल के बाद दौरे पर चौकसी इतनी बढ़ा दी है कि एनआईएसई के वैज्ञानिकों पर भी उन्हें विश्वास नहीं है। उनकी जांच-पड़ताल भी करवाई गई है।
बताया गया है कि महानिदेशक की भी सुरक्षा एजेंसियों ने पड़ताल करवा ली है। यहां 40 सोलर रिसर्च साइंटिस्ट हैं, जो दुनिया के 121 सूर्यपुत्रों (जहां सौर ऊर्जा के दोहन की अपार संभावनाएं हैं) को पर्यावरण हितैषी सोलर एनर्जी पर काम करने का प्रशिक्षण देंगे और इस मामले में अग्रणी देशों से सीखेंगे। बताया गया है कि इन सभी वैज्ञानिकों की पुलिस वेरीफिकेशन हुई है।
रविवार को मेवात से अलकायदा के संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी और इसके बाद आईएस से कनेक्शन रखने वाले चार आतंकियों की हरिद्वार से गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा और चौकस कर दी गई है।
बताया गया है कि ये आतंकी दिल्ली-एनसीआर समेत कई जगहों पर बम धमाका करने की साजिश रच रहे थे। ऐसे में कोई भी सुरक्षा और खुफिया एजेंसी ओलांद और पीएम मोदी की सुरक्षा में कोई चूक नहीं छोड़ना चाहती। मालूम हो कि अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) भी ओलांद के दौरे पर गृह मंत्रालय के जरिये सुरक्षा इनपुट ले रही है।
शहर में हाई अलर्ट कमांडो तैनात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के दौरे को लेकर शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। 25 को मोदी और ओलांद फरीदाबाद-गुड़गांव रोड स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी में आयोजित कार्यक्रम में आ रहे हैं।
मेवात में अल कायदा का आतंकी पकड़े जाने के बाद चौकसी बढ़ाना और जरूरी हो गया था। पुलिस का कहना है 26 जनवरी को लेकर भी कि निगरानी बढ़ाई गई है। जगह-जगह कमांडो जांच कर रहे हैं।