बुजुर्ग जोगेंद्र सिंह को हत्यारे ने सब्जी काटने वाले घरेलू चाकू से से मौत के घाट उतारा था। चाकू से चेहरा गोदने से पहले हत्यारे ने सिल के बट्टे से उनके सिर पर वार कर उन्हें गिरा दिया था। चाकू छोड़कर फरार हुए हत्यारे का पुलिस कोई सुराग नहीं जुटा सकी है। पुलिस ने मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।
मूल रूप से सीवान, बिहार के रहने वाले जोगेंदर सिंह नौकरी के सिलसिले में करीब चालीस साल पहले यहां आए थे। संजय कॉलोनी में उन्होंने एक छोटा मकान बनाया था। इसका भूतल उन्होंने सहरसा, बिहार निवासी ओम शंकर को वर्कशॉप के लिए किराए पर दे रखा है, प्रथम तल पर बेटी नेहा और पत्नी के साथ वह रहते थे। बेटी नेहा के मुताबिक जोगेंदर सिंह या परिवार के किसी भी सदस्य की किसी से कोई दुश्मनी या विवाद नहीं था।
पुलिस का मानना है कि जोगेंद्र सिंह की हत्या बाकायदा रेकी कर की गई। हत्यारे को यह मालूम था कि जोगेंद्र सिंह घर पर कब अकेले मिलेंगे और उसके पास हत्या कर फरार होने के लिए कितना समय होगा। पुलिस अब उन लोगों को शक के घेरे में ले रही है जिन्हें जोगेंद्र सिंह के परिवार की दिनभर की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। पुलिस इस कोण पर भी जांच कर रही है कि बुजुर्ग की मौत से किसको आर्थिक या अचल संपत्ति का फायदा हो सकता है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बुजुर्ग की चल अचल संपत्ति हथियाने के इरादे से तो उनकी हत्या नहीं की गई। फिलहाल पुलिस को हत्यारे के चाकू से ज्यादा कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा है। संजय कॉलोनी चौकी इंचार्ज सोहनपाल खटाना ने बताया कि ब्लाइंड मर्डर में कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। मामले की जांच में सेक्टर 48 सीआईए को सौंपी गई है।
किसी भी कीमत पर जिंदा नहीं रहने देना चाहता था हत्यारा
हत्यारे ने जोगेंद्र सिंह के सिर पर बट्टे से वार करने के बाद उनकी खोपड़ी में चाकू से सात आठ वार किए। सब्जी काटने वाले चाकू के वार खोपड़ी में काफी गहरे थे, चाकू के वार से उनका दांया गाल और कान भी कट गया था। इतने वार करने के बाद हत्यारे ने उनका गला भी रेत डाला। वार के तरीकों से लगता है कि हत्यारा जोगेंद्र सिंह को किसी भी कीमत पर जिंदा नहीं छोडना चाहता था।