फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की मिलीभगत से मोदीनगर में मिलावटी मावा का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। मावा में मिल्क पाउडर और केमिकल का प्रयोग लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
यहां से मावा दिल्ली और उत्तराखंड सहित सूबे के कई हिस्सों में सप्लाई होता है। बड़े स्तर पर चल रहे मिलावट के इस धंधे में विभागीय अफसरों की मिलीभगत है।
फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अफसरों की मिलीभगत के बिना मिलावट खोरी संभव नहीं। यही कारण है कि नमूना फेल होने के बावजूद रिपोर्ट को तीन साल तक दबाए रखा गया।
मिलावट के लिए बदनाम फरीदनगर-निवाड़ी में ज्यादा सैंपल भी नहीं लिए गए। यहां पर बड़े गोदामों में ही मावा बनाया जाता है। यहां बनने वाला मिलावटी मावा दिल्ली, कानपुर, मुरादाबाद, हरियाणा और उत्तराखंड भेजा जाता है।
यह भी हुआ खेल
दीपावली पर डीएम के आदेश पर मावा के नमूने लिए गए थे। इसमें भी खेल किया गया। बाहरी जिलों के मिलावटी मावा को अफसरों की टीमों ने नष्ट करा दिया, जबकि फरीदनगर-निवाड़ी का मावा जाने दिया। लोगों की शिकायत पर यहां नमूने लेने को अभियान चलाने के आदेश तो कई बार हुए लेकिन नमूना कभी कभार ही लिया गया।