नर्सरी दाखिले की रेस में स्कूलों के कुछ अलग-अलग मानकों के कारण इस बार दाखिले की कटऑफ में उछाल आने की संभावना है। स्कूलों के मानकों के कारण ही कटऑफ का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है। माना जा रहा है कि इस बार 50-55 अंक पाने वाले बच्चे के ही दाखिले के ज्यादा चांस हैं। बीते सालों तक 45-50 अंक पाने वालों को भी दाखिला मिलने की उम्मीद होती थी। एक सीट पर ज्यादा दावेदार होने पर लॉटरी की स्थिति भी बनेगी।
बीते सालों की भांति ही इस वर्ष भी अंकों के खेल में कोई पास होगा तो र्कोई फेल। कुछ निजी स्कूलों ने अपने मानकों में कुछ विशेष मानकों को शामिल किया है। मसलन डीपीएस आर.के. पुरम में इस बार उन बच्चों के भी दाखिले हो सकेंगे, जिनके अभिभावक डीपीएस सोसायटी के 11 कोर स्कूल से पढ़े हों।
इन कोर स्कूलों में दिल्ली में डीपीएस के 6 स्कूल, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, बुलंदशहर व नवी मुंबई में स्थित डीपीएस शामिल हैं। इस तरह से इन स्कूलों में जो भी अभिभावक (माता-पिता) पढ़े होंगे और वह अपने बच्चे का दाखिला चाहेंगे तो उन्हें 10-10 अंक मिल सकेंगे।
एपीजे पीतमपुरा स्कूल न केवल पूर्व छात्रों के रूप में अभिभावकों को सात अंक दे रहा है वहीं यदि दादा-दादी या माता-पिता एपीजे के लिए गैर वित्तीय कार्यकर्ता हों तो 14 अंक मिलेंगे, यदि अभिभावकों ने एपीजे सोसायटी के किसी कॉलेज या संस्थान से पढ़ाई की हो तो पांच अंक प्रदान किए जाएंगे।
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि इस बार स्कूल के कुछ मानक विशेष हैं। इस कारण से इस बार कटऑफ का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। बीते साल तो देखने में आता था कि 45-50 अंक पाने वाले अभिभावकों को दाखिला मिल जाता था। लेकिन इस बार जिस तरह के मानक हैं उससे 50-55 अंक पाने वाले ही अभिभावक अपने बच्चे का दाखिला पा सकते हैं।
माना जा रहा है कि दाखिला कटऑफ में कुछ स्कूलों में तो उछाल ही आएगा। उन्होंने बताया कि अभिभावकों भी आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने से पहले ही कट ऑफ की चिंता सताने लगी है। अभिभावक लगातार यह जानना चाह रहे हैं कि उनका बच्चा कितने अंक पाने पर दाखिला पा सकेगा।