सरकारी जमीन पर बने अल्पसंख्यक स्कूल भी दिल्ली सरकार द्वारा नर्सरी दाखिलों को लेकर तय नीति के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। इन स्कूलों ने तय दिशा-निर्देश को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने का आग्रह किया है। अदालत ने याचिका के आधार पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने फिलहाल अल्पसंख्यक स्कूलों की उस मांग को नामंजूर कर दिया जिसमें याचिका का निपटारा होने तक दाखिला नीति पर रोक लगाने की मांग की थी।
यह याचिका समरविले और माउंट कार्मेल स्कूल ने दायर की है। याची ने 9 जनवरी को सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती दी है। सरकारी जमीन पर बने इन स्कूलों ने कहा है कि उन पर भूमि आवंटन शर्तें लागू नहीं होती है।
स्कूलों की ओर से अधिवक्ता रोमी चाको ने सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट के पूर्व के दो फैसले का हवाला दिया है। स्कूलों ने पारामती एजूकेशनल एवं कल्चरल बनाम भारत सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पांच जजों के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि फैसले के अनुसार उन पर भूमि आवंटन की शर्तें नहीं थोपी जा सकती है।
उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि शिक्षा का अधिकार कानून अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं होता है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने इस फैसले में भूमि आवंटन की शर्तों के बारे में जिक्र नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक स्कूलों को अपने समुदाय के बच्चों को अपनी मर्जी से दाखिला देने की छूट दी है, लेकिन दूसरे समुदाय के बच्चों को दाखिला देने में सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन करना होगा।
सरकार ने दिशा निर्देशों में कहा है कि स्कूल अपने समुदाय के बच्चों को दाखिला देने के लिए अपनी मर्जी से दिशा-निर्देश बना सकते हैं। दूसरे समुदाय के बच्चों को दाखिला देने के लिए सरकार द्वारा जारी शर्तों का पालन करना होगा। गौरतलब कि सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों व अभिभावकों ने पहले ही तय निर्देशों को चुनौती दी हुई है।