अदालत ने एक डाक्टर को नर्स द्वारा रेप के फर्जी मामले में फंसाने को गंभीरता से लिया है। अदालत ने आरोपी बनाए गए डॉक्टर को बरी करते हुए उसे नर्सिंग छात्रा के खिलाफ मुआवजे के लिए मुकदमा दायर करने की इजाजत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा आरोपी एक डॉक्टर है उसे जिंदगी भर रेप के कलंक के साथ जीना होगा व उसकी प्रतिष्ठा बहाल करना संभव नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि बरी किए गए डॉक्टर की गिरफ्तारी के समय समाज में काफी हंगामा हुआ लेकिन अब उसके बरी होने पर उसकी दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं देगा।
अदालत ने कहा कि इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता कि आरोपी एक डॉक्टर है और उसे अपमान, संकट और दुख का सामना करना भी करना पड़ा है। अदालत ने कहा कि डॉक्टर को एक बलात्कार के मामले अभियुक्त होने का कलंक से पीड़ित रहेगा और उसकी गरिमा बहाल करना संभव नहीं हो सकता।