दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षिक सत्र 2019-20 में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले शहीदों और खुदकुशी करने वाले किसानों के बच्चों का हाथ एनएसयूआई थामेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जन्मदिवस पर पार्टी के छात्र संगठन एनएसयूआई ने ऐेसे बच्चों के दाखिले की फीस भरने का फैसला किया है। योजना की शुरुआत सबसे पहले डीयू से की जा रही है। डीयू के बाद इस योजना का दायरा देशभर में बढ़ाया जाएगा। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने इसकी घोषणा बुधवार को की।
एनएसयूआई के रायसीना रोड स्थित स्थित कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीरज कुंदन ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरुआत डीयू से की जा रही है। दरअसल, डीयू में देशभर से छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। इसलिए इसका चयन किया गया है। इस योजना को बाद में देशभर में जहां-जहां भी कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां शुरू किया जाएगा।
एनएसयूआई दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा कि शहीद जवानों (सेना, अर्धसैनिक बल, प्रादेशिक पुलिस) के बच्चों को डीयू में दाखिला लेने के लिए फीस की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इनके पास फीस भरने के लिए राशि नहीं है तो एनएसयूआई ही फीस भरेगी। खुदकुशी करने वाले किसान परिवार से बच्चे दाखिले के लिए आएंगे तो उनकी भी फीस भरी जाएगी।
एनएसयूआई ने इसके लिए एक ईमेल nsuifordu@gmail.com जारी किया है। इस पर पंजीकरण के बाद राष्ट्रीय कमेटी वेरिफिकेशन कर उन सभी परिवारों के बच्चों की मदद करेगी। कितने छात्रों की फीस दी जाएगी, यह अभी तय नहीं है। फिलहाल दावा सभी योग्य छात्रों को लाभ देने का है।
लाकड़ा ने कहा कि डीयू में यू-स्पेशल नहीं है। दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो परिवहन मंत्री इलेक्ट्रिक बसें चलने के दावे करने लगे हैं। अभी सड़कों पर बसों की संख्या ही बेहद कम है। डीयू में 46 यू-स्पेशल बसें चलती थीं। ऑफ कैंपस में फीडर बस थी, लेकिन अब सब बंद हो चुकी हैं।