अब नोएडा के गांवों में मनमानी तरीके से घरों के निर्माण पर विराम लगेगी। ग्रामीण भवन नियमावली को नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। देहात के सुनियोजित विकास के लिए कंसलटेंट की नियुक्ति पर भी मुहर लगी है।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण के अधीन कुल 81 गांव हैं। इनमें ग्रामीण अब तक अपने तरीके से घर बनाते हैं। उनके लिए कोई बायलॉज नहीं थे। शुक्रवार को बोर्ड बैठक में इस पर मुहर लग गई है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्र में भी ग्राउंड कवरेज और एफएआर तय कर दिया गया है। ग्रामीण इससे ज्यादा न तो ग्राउंड कवरेज का उपयोग कर सकते हैं और न ही एफएआर का। इसे वैकल्पिक तौर पर लागू किया गया है। नक्शा पास कराने के लिए पांच रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क तय किया गया है।
प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण के अनुसार, इसका मतलब सिर्फ यही है कि देहात क्षेत्र का भी विकास सेक्टरों की तर्ज पर हो। नियमावली के मुताबिक, निर्माण होने से अन्य विकास कार्यों के लिए भी जगह मिल सकेगी। उनका कहना है कि सुनियोजित विकास के लिए ही कंसलटेंट नियुक्त किया जा रहा है।
उसकी रिपोर्ट के आधार पर विकास कार्य कराए जाएंगे। अभी तक ग्रामीणों की मांग के आधार पर विकास कार्य हो रहे हैं। हालांकि, सोरखा के ग्राम प्रधान नरेश यादव और किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने विरोध करते हुए कहा कि ग्रामीण प्रतिनिधियों के बिना प्राधिकरण ने इसे लागू किया है। इस पर विरोध होगा। इन्होंने सवाल उठाया है कि जब ग्रामीणों के नाम पर जमीन ही नहीं छोड़ी है तो यह बायलॉज लागू कहां होगा।